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  आर टी आई के जवाब में प्राधिकरण ने कबूला सच 

 नॉएडा : नॉएडा शहर को इंडस्ट्रियल टाउनशिप कहकर आम जनता को गुमराह करने की  चाल का पर्दाफाश हो चुका है , प्राधिकरण और प्रदेश सरकारों का सालों से चला आ रहा परदे के पीछे का खेल बाहर आ गया है ! नॉएडा शहर की जनता को लोकतंत्र के संविधानिक अधिकारों से वंचित रखने , यहाँ निकाय चुनाव अथवा लोकल बॉडी स्थापित करने से वंचित  करने वाले नौकरशाहों ने हमेशा इस शहर को औद्योगिक बस्ती होने को ढाल  बनाकर  यहाँ किसी तरह   की लोकतान्त्रिक गतिविधि पर रोक लगाई हुई है ! 


नॉएडा और प्रदेश सरकार  ने कोर्ट में भी यह मत रखा है के नॉएडा एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप अर्थात औद्योगिक बस्ती है और इसी कारण यहाँ निकाय चुनाव होना आवश्यक नहीं है , जबकि देश के संविधान में साफ़ साफ़ अंकित है के देश का ऐसा कोई हिस्सा नहीं होगा जहाँ स्थानीय निकाय चुनाव नहीं होंगे , जिसका अपवाद सिर्फ कैंट क्षेत्र  एवं औद्योगिक बस्ती होंगे , किन्तु आर टी आई कार्यकर्ता एवं दिल्ली उच्च न्यायलय के अधिवक्ता श्री रंजन तोमर द्वारा सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछे गए सवाल के बाद प्राधिकरण फंसता हुआ दिखाई देता है ! 

श्री तोमर द्वारा लगाई गई आर टी आई के तीसरे सवाल में यह पूछा गया था के -
क्या औद्योगिक बस्ती होने के कारण नॉएडा के भीतर औद्योगिक श्रमिकों ,कारखाने के कर्मचारियों के लिए किसी भी प्रकार की आवासीय योजना अथवा आवासीय सेक्टर स्थापित  किये गए हैं ? यदि हाँ तो कहाँ ?

जिसके जवाब में प्राधिकरण कहता है के प्राधिकरण के पास इस प्रकार की कोई योजना है ही नहीं ! 


बड़ा सवाल यह उठता है के जब नॉएडा को औद्योगिक बस्ती बताने वाले प्राधिकरण और प्रदेश सरकार यहाँ रहने वाले श्रमिकों के लिए एक सेक्टर अथवा योजना तक नहीं बना पाए , तो यह शहर औद्योगिक बस्ती कहाँ से हो गया ,  असल में यहाँ उद्योग बाकी औद्योगिक शहरों से बेहद कम मात्रा में हैं , और उसके बावजूद कानपूर ,ग़ज़िआबाद जैसे औद्योगिक शहरों में निकाय चुनाव होते हैं ,नॉएडा मूलतः आवासीय सेक्टरों से बसा हुआ है जहाँ रहने वाली ज़्यादातर जनता यहाँ के उद्योगों से नहीं जुडी हुई ! 

श्री तोमर ने यह आरोप लगाया के साज़िश के तहत प्राधिकरण और अब तक आयी प्रदेश सरकारों ने यहाँ का पैसा लूटने के एवज़ में स्थानीय निकाय प्रणाली शुरू होने ही नहीं दी ,वरना क्या कारण होता के विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसा भी शहर है जहाँ लोकतंत्र की नींव ही गायब है , श्री तोमर ने नॉएडा को अंग्रेजी राज़ जैसा बताया , प्रदेश सरकार ब्रिटैन में बैठी महारानी और अफसर अंग्रेजी राज के वाइसराय एवं गवर्नर , यहाँ की  खुश करने और गुस्सा दबाने की एवज़ में भारतीय जनता में से जिस प्रकार कुछ नेताओं को चुना जाता था , उसी प्रकार आर डब्लू ए चुनी जाती है , जिसकी कोई संविधानिक ताकत नहीं है , और ग्रामीण जनता के  पास तो यह ताकत भी नहीं है , यहाँ का सारा पैसा लखनऊ में बैठी सरकार के पास जाता है ,उसी प्रकार जैसे अंग्रेजी समय में ब्रिटैन जाया करता था ! 

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