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चित भी मोरा, पट भी मोरा

देवेंद्र दौतम
नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के लेख ने हलचल मचा दी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जिस बात को धारदार तरीके से नहीं कह पा रहे थे उसे भाजपा के ही एक बड़े नेता ने कह दिया। यशवंत सिन्हा एक अर्थशास्त्री हैं। उनका यह कहना की नोटबंदी विफल हुई और जीएसटी ने लोगों की परेशानी बढ़ाई, मायने रखती है।
इससे पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी मोदी सरकार को आगाह किया था कि अभी जो माहौल है उसमें भाजपा के लिए अगला चुनाव निकाल पाना मुश्किल होगा। संघ के अंदर अध्ययन और विचार-विमर्श की परंपरा है। उनके अंदर विभिन्न विषयों के विद्वान मौजूद हैं। पीएम मोदी ने आर्थिक क्षेत्र के बड़े निर्णय लेने से पूर्व यदि संघ और भाजपा के अर्थशास्त्रियों से भी अगर विचार विमर्श कर लिया होता तो शायद गाड़ी पटरी से इस कदर बाहर नहीं निकलती। अगर यह बातें विपक्षी दलों की ओर से आई होती तो सरकार बड़े आराम से इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर टाल सकती थी लेकिन जब संघ और भाजपा के अंदर से यह आवाज़ निकल रही तो इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता। यह अपने लोगों की एक चेतावनी है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। अगर सरकार अभी भी सतर्क हो जाए तो नुकसान की भरपाई की जा सकती है। लेकिन मोदी सरकार के कुछ मंत्री सच स्वीकार करने को तैयार ही नहीं है। उन्हें नोटबंदी के बड़े-बड़े फायदे दिखाई दे रहे हैं। इन आर्थिक प्रयोगों सो लाखों लोग बेरोजगार हुए तो शाह और जेटली जैसे दिग्गज नेता यह बयान दे रहे हैं कि करोड़ों रोजगार सृजित किए गए हैं। इस तरह के बयानों से सच्चाई नहीं बदलती लेकिन लोगों का गुस्सा भड़कता है। हिटलर कहता था कि झूठ कोइतनी बार दुहराओ कि वह सच लगने लगे। लेकिन आंकड़ों की हेराफेरी की जा सकती है, ज़मीनी सच को झुठलाया नहीं जा सकता। मोदी सरकार ने सिर्फ लोगों को चौंकाने की मंशा से गोपनीयता बरती और किसी भी निर्णय को लागू करने से पूर्व न कोई होमवर्क किया गया और न ही विशेषज्ञों की राय ली गई। इसके कारण जो परिणाम आने चाहिए थे, नहीं आए। भविष्य में इन निर्णयों का क्या लाभ मिलेगा यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन वर्तमान में तो इससे नुकसान ही दिखाई दे रहा है। विदेश नीति के मोर्चे पर, रक्षा के सवाल पर सरकार जितनी दृढ़ और कामयाब दिख रही है घरेलू मोर्चे पर उतनी ही विफल नजर आ रही है। अगर विपक्ष की कमजोरी को देख सरकार पुनर्वापसी के प्रति आश्वस्थ है तो उसे अपनी गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए। हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है और हर थीसीस का एंटी थीसीस तैयार होता है। किचेन कैबिनेट के चमचों के बयानों के भ्रमजाल से निकलकर समय रहते गाड़ी को पटरी पर लाने का प्रयास करने की जरूरत है। वर्ना समय हाथ से निकल जाने पर पछतावे के अलावा कुछ भी शेष नहीं बचेगा।

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