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देवेंद्र गौतम
नई दिल्ली। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में कश्मीर मुद्दे पर भारत को घेरने और इसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश की लेकिन उसका दांव उल्टा पड़ गया। चीन तक ने उससे पल्ला झाड़ लिया। पाकिस्तान जहां कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने के प्रयास में है वहीं जमीनी हालत यह है कि उसके कश्मीर राग को अब दुनिया का कोई देश सुनने को तैयार नहीं है। इस बार तो उसके सबसे करीबी मित्र चीन ने भी संयुक्त राष्ट्र संघ में उसे लताड़ लगा दी। चीन ने साफ-साफ कह दिया है कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है, पाकिस्तान इसे खुद निपटे। भारत ने तो उसे टेररिस्तान और आतंकवाद का निर्यात करने वाला देश करार दे दिया। ओसामा बिन लादेन को पनाह देने के मामले में तो पहले ही विश्व समुदाय के समक्ष उसकी किरकिरी हो चुकी है। अभी भी आतंकियों को पनाह देने के मामले में वह विश्व का सबसे बेशर्म देश बन चुका है। उसपर तुर्रा यह कि वह खुद को आतंक से पीड़ित भी बताता है। एक लंबे समय तक अमेरिका उसका सबसे बड़ा शुभचिंतक और मददगार देश बना हुआ था। लेकिन अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन ओसामा बिन लादेन को अपने सैन्य शिविर में पनाह देकर पाकिस्तान ने उसे अपना असली चेहरा दिखा दिया। अमेरिका ने लादेन का पाकिस्तान में घुसकर सफाया कर दिया लेकिन इसके बाद पाकिस्तान से उसका मोहभंग होने लगा। अमेरिका की मदद में कमी आने पर पाकिस्तान ने चीन से नजदीकी बढ़ाई। चीन भी लंबे समय तक उसके भ्रमजाल में उलझा रहा। लेकिन पाकिस्तान के सरकार प्रायोजित आतंकवादियों ने चीन को भी अपना निशाना बनाना शुरू किया। उधर विश्व महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले चीन को यह समझ में आने लगा कि पाकिस्तान के छिछोरेपन के कारण विश्व समुदाय से वह अलगाव में पड़ता जा रहा है। इसके बाद उसने पाकिस्तान से दूरी बनानी शुरू की। संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान को खुलकर लताड़ लगाना उसके मोहभंग की शुरुआत का द्योतक है। हालांकि चीन पाकिस्तान में इतना निवेश कर चुका है कि अचानक उससे रिश्ता नहीं तोड़ सकता लेकिन उसकी सब गलत-सही हरकतों पर जायज करार देकर अपनी किरकिरी भी नहीं करा सकता। अब पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक ही दरवाजा बच जाता है। वह दरवाजा है रूस का। लेकिन रूस एक महाशक्ति है। वह उसकी ओछी हरकतों को ज्यादा समय बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान का उसके सामने कोई वजूद भी नहीं है। अब भी अगर पाकिस्तान आतंकवाद का संरक्षण देना बंद नहीं करता और अपने आप को सुधारता नहीं तो वह समय दूर नहीं जब वह विश्व का सबसे अवांछित और त्याज्य देश बनकर रह जाएगा। विदेशी सहायता के बिना वह आतंकियों का संरक्षक भी नहीं बना रह सकता। कहीं ऐसा न हो उसके पोषित आतंकी संगठन ही उसके लिए भष्मासुर बन जाएं।

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