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टेलीकॉम इंडस्ट्री में लाया भूचाल, अन्य कंपनियों को घटाना पड़ा टेरिफ, डाटा खपत के मामले में नंबर वन भरा भारत

नई दिल्ली। रिलायंस जियो की लॉन्चिंग के एक साल पूरे हुए। इस अवधि में जियो ने टेलीकॉम इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया था। शुरू में मुफ्त की रेवड़ियां बांटने और बाद में किफायती दरों पर डाटा और कॉल देने के बाद अन्य टेलीकॉम कंपनियों पर भी दवाव बना था कि वे अपने टैरिफ कम करें।
बीते एक साल में भारत मोबाइल डाटा की खपत के मामले में नंबर वन देश बन गया है। पहले इस मामले में भारत का नंबर 155 वां था। अब हालत यह है कि हर महीने डेटा खर्च 20 करोड़ जीबी के मुकाबले 150 करोड़ जीबी हो गया है। जियो का दावा है कि 125 करोड़ जीबी डेटा का इस्तेमाल तो अकेले उसके ग्राहक ही कर रहे हैं।
डाटा खपत में सबसे ज्यादा योगदान वीडियो का ही रहता है। अकेले जियो में ही वीडियो स्ट्रीमिंग हर महीने 165 करोड़ घंटे से अधिक है। वहीं, जियो के वॉयस टैरिफ में 250 करोड़ मिनट से ज्यादा खर्च होते हैं।
जियो के लॉन्च होने से पहले टैरिफ 250 रुपए प्रति जीबी था, जो अब 50 रुपए प्रति जीबी से भी कम हो गया है। मंथली मोबाइल बिल भी 2016 के अंत में 349 रुपए हुआ करता था, जो अब घटकर 240-280 रुपए तक पहुंच गया है।
वायरलेस ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 31 अगस्त 2016 तक 154 मिलियन थी, जो जून 2017 में बढ़कर 282 मिलियन हो गई है। स्मार्टफोन की फोरजी डिवाइस की शिपिंग साल 2016 की पहली तिमाही में 66 फीसद थी, जो 2017 की पहली तिमाही में बढ़कर 95 फीसद हो गई है।
मार्च 2016 में 4जी स्मार्टफोन की संख्या 47 मिलियन थी, जो मार्च 2017 में बढ़कर 131 मिलियन हो गई थी। वहीं, सिम के एक्टीवेशन में पहले एक से तीन दिन का समय लगता था, जबकि अब कम से कम 15 मिनट में ही यह काम हो जाता है।

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