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सरकार ने कॉरपोरेट से मांगा सीएसआर का 7% पैसा


नई दिल्ली। स्वच्छता अभियान में कोष की कमी महसूस की जा रही है। इसके
आलोक में कारपोरेट मामलों के राज्यमंत्री पी.पी. चौधरी ने शनिवार को 11 लाख से अधिक कंपनियों से कहा कि वे अपने कारपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कोष का 7% स्वच्छ भारत मिशन के लिए खर्च करें और अपने कर्मचारियों को सफाई अभियान चलाने का निर्देश दें।
इसके अलावा मंत्री ने कंपनियों से ग्राम पंचायतों में स्वच्छता संदेश लिखे हुए होर्डिंग लगाने के लिए भी कहा है।  चौधरी का यह प्रस्ताव सरकार के दो अक्तूबर तक चलाए जाने वाले स्वच्छता ही सेवा अभियान के दौरान आया है।  चौधरी ने कंपनियों के प्रमुखों को इस संबंध में पत्र लिखा है।  इसकी जानकारी उन्होंने ट्विटर पर दी।  उन्होंने ट्वीट किया, स्वच्छता ही सेवा अभियान के लिए 11 लाख से अधिक कंपनियों के प्रमुखों को पत्र लिखकर उनसे सीएसआर कोष का एक हिस्सा स्वच्छ भारत कोष के लिए देने को कहा।  शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वच्छता ही सेवा अभियान को लॉन्च किया।  
स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत देश भर अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएगी।  साथ ही देश के लोगों से सफाई और शौचालय के निर्माण के लिए श्रमदान करने को कहा गया है।  1 अप्रैल 2014 को लागू सीएसआर नियमों के शेड्यूल 7 के मुताबिक 5 करोड़ रुपये की नेट प्रॉफिट कंपनियों को पिछले तीन सालों के औसत लाभ का 2 प्रतिशत सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों पर खर्च करने को कहा गया है।  इसमें स्वच्छता, शिक्षा, हेल्थकेयर और गरीबी हटाओ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।  वैश्विक सीएसआर मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म गोदारा की को-सीईओ और फाउंडर ऋचा बाजपेई ने लाइव मिंट से कहा कि वित्त वर्ष 2016-17 में कारपोरेट इंडिया ने सीएसआर का 250 करोड़ स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च किया।  स्वच्छ भारत मिशन पर और खर्च करने के लिए कंपनियों को प्रेरित करने की खातिर सीएसआर का 7 प्रतिशत की सीमा तय करने के बजाय जीएसटी के रेट में कमी करनी चाहिए।  इससे सैनिटरी और अन्य जरूरी उत्पाद सस्ते होंगे।  जैसे साबुन और सैनिटरी नैपकिन अभी 12 से 18 प्रतिशत के कर दायरे में आते हैं।  उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्धारित लक्ष्य 12 करोड़ शौचालय बनाने के लिए 2 लाख करोड़ का फंड चाहिए।  जिसका एक बड़ा हिस्सा सरकारी फंड से आना चाहिए।  कारपोरेट इंडिया को शौचालय के रखरखाव, स्वास्थ्य और हाइजीन को लेकर व्यावहारिक बदलाव की जिम्मेदारी उठानी चाहिए, जोकि स्वच्छ भारत मिशन की कामयाबी के लिए बेहद अहम है।

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