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शहीद सैनिकों की विधवाओं को किया सम्मानित 

गाजीपुर। शहीद वीर अब्दुल हमीद के 52वीं शहीद दिवस समारोह में शामिल होने के लिए यूपी के गाजीपुर जिले में रविवार को पहली बार सेना प्रमुख बिपिन रावत पहुंचे। आर्मी चीफ बिपिन रावत ने बातों-बातों में साफ किया कि पाकिस्तान के साथ नेता चाहें तो बातचीत का रास्ता निकाल सकते हैं। लेकिन सेना सही समय पर समुचित जवाब देगी।
आर्मी चीफ बिपिन रावत ने यह भी कहा कि डोकलाम जैसी घटना चीन के साथ फिर ना हो इसको सुनिश्चित करने के लिए अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। भविष्य में चीन का जिस तरह का रुख होगा उसके लिहाज से कदम उठाया जाएगा। आर्मी चीफ बिपिन रावत पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जो अब्दुल हमीद के शहीद समारोह में शिरकत करने गाजीपुर पहुंचे।
उनका कहना है कि अगर आर्मी के सीनियर अधिकारी इस तरह से मनोबल बढ़ाने के लिए कार्यक्रमों में जाएं तो उससे ना सिर्फ सेना का बल्कि इलाके के नौजवानों का भी हौसला बढ़ता है और वह सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित होते हैं। आर्मी चीफ के साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत ने भी समारोह में शिरकत की।
कार्यक्रम के दौरान 1965 और 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं को सम्मानित किया गया। इलाके के लोगों की मांग पर आर्मी चीफ ने गाजीपुर में एक सैनिक ट्रेनिंग सेंटर खोले जाने की बात भी कही। लेकिन उससे ज्यादा जरुरी बताया कि नौजवान पास के सैनिक ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग लें जिससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग सेना में शामिल हो सकें।
आर्मी चीफ बिपिन रावत ने ये भी बताया कि सीमा पर हालात बिल्कुल भी बुरे नहीं हैं। इस मामले पर मीडिया को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर में और सीमा पर होने वाले हमले यह सामान्य घटनाएं हैं। ये अक्सर होती रहती हैं और उनका माकूल जवाब भी दिया जाता है।उन्होंने कहा कि मीडिया को ऐसी घटनाओं को ज्यादा बढ़-चढ़कर दिखाने से बचना चाहिए।
गौरतलब है कि जनवरी 2017 में नए आर्मी चीफ बनने के बाद शहीद की धर्मपत्नी रसूलन बीबी आर्मी चीफ रावत से मिली थीं और ये आग्रह किया था कि उनके जीते जी वो एक बार शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके मेमोरियल आएं। हर साल 10 सितंबर को शहीद अब्दुल हमीद का परिवर उनके लिए एक सभा का आयोजन करता है। शहीद परमवीर चक्र अब्दुल हमीद की पत्नी की वृद्धावस्था को देखते हुए जनरल रावत ने खुद गाजीपुर जाने का फैसला किया।
1965 की जंग में क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद को साहस का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त हुई थी। इसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र प्रदान किया था।

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