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देवेंद्र गौतम
नई दिल्ली। आसाराम, राम रहिम और फलाहारी बाबा के बाद बलात्कारी बाबाओं की सूची में एक और नाम जुड़ गया है। वे हैं सीतापुर के सियाराम दास। उनपर एक युवती ने मामला दर्ज कराया है। उस युवती को बाबा की शिष्या ने 50 हजार में खरीदा और बाबा के विभिन्न आश्रमों में घुमाते हुए उसका रेप किया जाता रहा और एमएमएस बनाया जाता रहा। युवती की शिकायत पर बाबा के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। सीतापुर में इस बाबा का 250 बीघा में आश्रम है। लाखों अनुयायी हैं। भारी भरकम चढ़ावा आता है और बाबा का असली चेहरा अब लोगों के सामने आया है।
धर्म के नाम पर लोग इस कदर अंधे हो जाते हैं कि उसका चोला पहनकर बड़े से बड़े अपराधी अपना असली चेहरा छुपाए रहते हैं और पर्दे के पीछे कुकर्म करते रहते हैं। 21 वीं सदी में भी लोग भावनाओं के पीछे पागल हो जाते हैं। अंधभक्ति का आलम यह है कि इसतरह के ढोंगी बाबाओं की करतूतों के उजागर होने के बाद भी उसके प्रति अपना मोह त्याग नहीं पाते। आसाराम बलात्कार के आरोप में जेल में बंद हैं लेकिन आज भी उनके समर्थकों की एक बड़ी तादाद उनके प्रति निष्ठावान है और यह मानती है कि उन्हें फंसाया गया है। राम रहीम के लिए तो कई हजार लोग आत्महत्या करने को तैयार बैठे हैं। उन्हें पीड़िताओं से कोई हमदर्दी नहीं है। उन्हें लगता है कि बाबा चमत्कार करेंगे और एक झटके में जेल से बाहर आ जाएंगे। अभी तक जो सूचनाएं सामने आई हैं उनसे स्पष्ट है कि डेरे के नाम पर एक बहुत बड़े आपराधिक गिरोह का संचालन किया जा रहा था।
लेकिन आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो धर्म के प्रति आस्था रखता है। उनके मूल्यों के प्रति सजग रहता है और इस तरह के बाबाओं के चक्कर में नहीं पडता। यह तबका धर्म के चोले में अनाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करता। रावण अपने युग का प्रकांड विद्वान था। उसने सीता का अपहरण किया था। इसके बाद अपहरण की कितनी ही घटनाएं हुईं लेकिन समय के अंतराल में लोग ऐसी घटनाओं को भूल गए। अपहरम और बलात्कार की कई कहानियां तो पुराणों में दर्ज हैं जिनमें इंद्र, विष्णु और अन्य कई देवताओं को आरोपी बनाया गया है। लेकिन उन्होंने जो कुछ किया वह सामान्य वेशभूषा में किया। सीता के अपहरण को लोग इसलिए नहीं भूले कि रावण ने यह काम साधु का वेश धारण कर किया था। इस देश के लोगों की मानसिक और मनोवैज्ञानिक बनावट ही ऐसी है। वे साधु के चोले में अनाचार को बर्दाश्त नहीं करते। इसीलिए आज भी रावण का पुतला जलाया जाता है। इंद्र, विष्णु आदि को लोगों ने क्षमा कर दिया, रावण को आज तक क्षमा नहीं कर सके। अब जबकि साधु के चोले में अनाचार की बड़ी-बड़ी घटनाएं सामने आ रही हैं, यह तबका किस रूप में प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा, समय बताएगा। 

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