0
अंशुमान त्रिपाठी
नई दिल्ली। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का शिलान्यास हो चुका यह बड़ी बात है। 2022 तक अहमदाबाद के लोग इसपर सवार होकर दो घंटे में मुंबई पहुंच सकेंगे। यह प्रघानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसके आकार ग्रहण करने की शुरुआत हो चुकी है। जापान इसकी कुल लागत 1.10 लाख करोड़ का एक बड़ा हिस्सा 88 हजार करोड़ बेहद आसान शर्तों पर मुहैय्या करा रहा है। तकनीकी मदद भी कर रहा है। आधुनिक संसाधनों की दौड़ में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

लेकिन अब इसका क्या किया जाए कि भारतीय रेल की पटरियां जर्जर हो चुकी हैं और आए दिन इसके कारण हादसे हो रहे हैं। ट्रेनों का संचालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। इसका कोई विकल्प नहीं है इसलिए इसपर चलना मजबूरी भी है लेकिन इसपर भरोसा भी उठता जा रहा है।
बुलेट ट्रेन बहुत अच्छी चीज है। हम इसपर गर्व कर सकते हैं लेकिन इसकी सवारी नहीं कर सकते। यह देश के नवधनाड्य वर्ग की सुख सुविधा के लिए होगा। आम भारतीय तो सपने में ही उसकी सवारी कर सकेगा। उसकी जेब बुलेट ट्रेन का टिकट लेने की इजाजत नहीं देगी। उसे तो वर्तमान रेल प्रणाली पर ही निर्भर रहना होगा। इसे सुरक्षित बनाने के लिए क्या किया जा रहा है आम भारतीयों की चिंता का विषय यह है। दूसरी बात यह कि अभी बुलेट ट्रेन एक रूट पर चलाने की तैयारी है जिसमें 1.10 लाख करोड़ का खर्च होगा। उसका एक बड़ा हिस्सा जापान नगण्य ब्याज पर कर्ज के रूप में दे रहा है। तकनीकी मदद भी कर रहा है। लेकिन पूरे देश में इसकी पहुंच बनाने में कितना समय लगेगा और कितना खर्च आएगा इसका अनुमान ही लगाया जा सकता है। अभी तो यह प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य के लोगों के लिए होगा। बुलेट ट्रेन जरूर चलाना चाहिए। यह भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा होने में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन अपनी जमीनी सच्चाइयों को नज़र-अंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए। जापान में यह योजना पूरी तरह से सफल है। इसका कारण यह है कि जापान गरीबी और दरिद्रता पर काफी हद तक विजय प्राप्त कर चुका है। हमारे देश में अभी गरीबी और बेरोजगारी का मसला बरकरार है। नोटबंदी और जीएसटी के कारण बेरोजगारी बढ़ी है। सरकार भले स्वीकार न करे लेकिन जमीनी हकीकत यही है।

Post a Comment Blogger Disqus

 
Top