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बीएचयू की छात्राओं पर लाठी चार्ज

 नई दिल्ली। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में तीन-चार दिनों से चल रहे तनाव और छात्र-छात्राओं पर हुए लाठी चार्ज की घटना सरकार के संकल्प और उसकी जमीनी हकीक़त को रेखांकित करती है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल खड़े करती है। छात्राएं छेड़खानी करने वालों पर कार्रवाई और सुरक्षा प्रबंध को बेहतर बनाने की ही तो मांग कर रही हैं।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संकल्प के इस दौर में यदि मनचलों पर कार्रवाई की मांग को लेकर छात्राओं को धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का सहारा लेना पड़ता है तो इसका सीधा मतलब है कि प्रशासनिक तंत्र या तो अक्षम हो चुका है या फिर संवेदनहीन। शैक्षणिक परिसर में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का जिम्मा शैक्षणिक संस्थान के प्रशासन का होता है। अगर शिकायत मिलने के साथ ही कुलपति महोदय ने दोषी मनचले पर त्वरित कार्रवाई की होती और परिसर में सुरक्षा प्रबंधों को दुरुस्त किया होता तो यह नौबत नहीं आती। यह शिक्षण परिसर के अंदर अनुशासन का भी मामला था। लेकिन कार्रवाई करने की जगह कुलपति महोदय ने उल्टे लड़कियों को शाम के बाद हास्टल से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दे डाली। मतलब उन्होंने स्वीकार कर लिया कि एक खास अवधि के बाद वे छेड़खानी की घटनाओं पर रोक नहीं लगा सकते। इसके जरिए उन्होंने परोक्ष रूप से मनचलों का उत्साहवर्द्धन ही कर डाला। अगर विश्वविद्यालय परिसर को शाम के बाद असामाजिक तत्वों के हवाले किया जाएगा तो कुलपति महोदय दिन के समय आपराधिक घटनाओं को घटित होने से कैसे रोक सकेंगे...? अब योगी सरकार की बात करें तों उनके रोमियो ब्रिगेड के लोग सिर्फ सड़कों पर शरीफ लोगों को परेशान करने के लिए बने हैं क्या? विश्वविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की इकाई तो है ही। क्या उनके बीच रोमियो ब्रिगेड का गठन कर असली मनचलों की नकेल कसने की व्यवस्था नहीं की जा सकती थी? दूसरी बात यह कि उनका प्रशासनिक तंत्र विश्वविद्यालय प्रशासन के लठैत की भूमिका में उतरने की जगह उसपर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने और मनचलों पर कार्रवाई करने पर दबाव नहीं डाल सकता था। दबाव डालने में समस्या थी तो कम से कम सलाह तो दे ही सकता था। छात्रों को कम से कम यह तो महसूस होता कि इस राज्य में उनकी सुध-बुध लेने वाला कोई है। अगर उचित मांग करने वाली छात्राओं पर लाठी चार्ज करना ही योगी सरकार का एकमात्र विकल्प है तो फिर इतना सारा नाटक क्यों? क्या मकसद है रोमियो ब्रिगेड का? सिर्फ अराजकता फैलाना? क्या मतलब है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का? जो आंदोलन पर उतरी थीं वह तो बचाई हुई बेटियां थीं और पढ़ने के लिए विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था। योगी सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

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