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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया है कि मोहर्रम के साथ दुर्गा विसर्जन एक दिन से देर से किया जाएगा।
कोलकाता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वो मोहर्रम और दुर्गा विसर्जन को एक ही दिन एक अक्टूबर को कराए।
ममता सरकार की दलील थी कि एक ही दिन मोहर्रम और विसर्जन कराए जाने से कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। हाईकोर्ट ने ये दलील नहीं मानी। अलबत्ता कोर्ट ने ये जरूर कहा कि सरकार मोहर्रम और दुर्गा विसर्जन के अलग रुट तय करे। हालांकि हाईकोर्ट ने अभी विसर्जन पर सरकार के नोटिफिकेशन को रद नहीं किया है। बल्कि राज्य सरकार के नोटिफिकेशन की भर्त्सना जरूर की है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह लोगों को समुदाय और धर्म के आधार पर नहीं बांटे। गौरतलब है कि ममता सरकार ने दुर्गा विसर्जन को 30 सितंबर से एक अक्टूबर के बीच करने पर पाबंदी लगा दी थी, क्योंकि एक अक्टूबर को मोहर्रम है। राज्य सरकार ने दो अक्टूबर को विसर्जन करने के लिए कहा था।
गौरतलब है कि ममता सरकार के इस फैसले के खिलाफ हिंदू संगठन अदालत में चले गए थे। हाईकोर्ट ने ममता सरकार को निर्देश दिया है कि वो इसका रास्ता निकाले कि 30 सितंबर को आधी रात के बाद भी विसर्जन किया जा सके।
बंगाल की भाजपा नेता रूपा गांगुली ने फैसले पर कहा कि हम बहुत खुश हैं कि जनता के पक्ष में फैसला आया है। हमें कुछ समय के लिए राजनीति को किनारे रखकर बंगाल की संस्कृति के बारे में सोचना चाहिए। ममता जानूबझकर लोगों को बांट रही हैं। वह डर रही हैं कि बंगाल में भाजपा अच्छा कर रही है और लोग उससे जुड़ रहे हैं। वहीं भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा हाईकोर्ट के आदेश से साफ है कि राज्य सरकार कानून और व्यवस्था को बरकरार रखने में नाकाम रही है। अब इस सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है।

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