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कुछ आतंकी मान रहे हैं तो कुछ दया का पात्र

नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 16 पन्नों के हलफनामे में कहा है कि कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से रिश्ते हैं। ऐसे में ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इतना ही नहीं अब बांग्लादेश को भी रोहिंग्या से अपने देश की सुरक्षा सताने लगी है। म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची ने कहा है कि रोहिंग्या आतंकी हमलों में शामिल हैं  इसके बावजूद ममता बनर्जी से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक रोहिंग्या शरणार्थियों की पैरवी में जुटे हैं, कांग्रेस भी रोहिंग्या को लेकर मानवता की दुहाई दे रही है।
 रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर भारत में सियासत तेज हो गई है। दरअसल भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम अवैध रूप से रह रहे हैं। केंद्र सरकार इन रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने की कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार का मानना है कि इन रोहिंग्या शरणार्थियों से देश को खतरा है और इन अवैध शरणार्थियों को भारत से जाना ही होगा।
म्यांमार से भाग रहे रोहिंग्या मुस्लिमों का बड़ा ठिकाना बांग्लादेश बन रहा है। करीब 4 लाख रोहिंग्या मुस्लिम बंग्लादेश के कैंपों में रह रहे हैं। बांग्लादेश को डर है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआई रोहिंग्या मुस्लिमों की मदद से उनके देश में मुश्किलें पैदा कर सकती है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री शहरयार आलम ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के लिए खतरा हैं। पूर्व में ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं, जिनमें रोहिंग्या मुस्लिम शामिल थे। म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची ने कहा कि रोहिंग्या आतंकी हमलों में शामिल हैं। रोहिंग्या समूहों ने म्यांमार में हमले कराए है। सू ची ने कहा कि म्यांमार ने रोहिंग्या लोगों को संरक्षण दिया लेकिन नतीजा क्या निकला। हम आलोचनाओं से डरने वाले नहीं। सू ची ने कहा कि जो लोग म्यांमार में वापस आना चाहते हैं, उनके लिए हम रिफ्यूजी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। सू ची ने कहा, रखाइन प्रांत में फैले संघर्ष में जिन तमाम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए मैं दिल से दुख महसूस कर रही हूं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी का मानना है कि रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी आतंकवादी नहीं हैं। ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर उनके पास केंद्र सरकार के निर्देश आए हैं। ममता के मुताबिक, केंद्र ने राज्य सरकार से रोहिंग्या शरणार्थियों का डाटा मांगा है। ममता ने ये भी कहा, केंद्र ने हमें बताया है कि रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों के बीच आतंकवादी मौजूद हैं, मगर मुझे ऐसा नहीं लगता।
ममता ने आगे कहा, 'ऐसे एक या दो आतंकी उनके बीच हो सकते हैं, लेकिन हमें पूरे समुदाय को बदनाम नहीं करना चाहिए'। ममता ने ये भी कहा कि आतंकी गतिविधि से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'अगर कोई आतंकी है, तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा, मगर कोई आम व्यक्ति इसका शिकार न हो'।
एआइएमआइएम अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रोहिंग्या मुसलमानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई भी रोहिंग्या किसी आतंकी संगठन से संबंध के आरोप में गिरफ़्तार नहीं हुआ है। ओवैसी ने इसे बीजेपी का पुराना प्रोपेगेंडा बताते हुए रोहिंग्या शरणार्थियों की मॉनिटरिंग करने की बात की। ओवैसी ने कहा, इन लोगों के तन पर कपड़ा नहीं है, खाने को नहीं है, ये क्या ऐसा करेंगे? ओवैसी ने कहा, 'सरकार ने एक हलफनामे में हिंदू, सिख, पारसी और बुद्धिस्ट के पड़ोसी देश से आने पर सहूलियतें देने का निर्णय किया है, मगर मुसलमानों को इसमें शामिल नहीं किया गया है'।
कांग्रेस नेता टॉम वडक्कन ने कहा कि भारत का कल्चर हमेशा से मानवतावादी रहा है। सरकार को यही रवैया अपनाना चाहिए। रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर सरकार का इल्जाम है कि कांग्रेस के दौर में ये आकर बसे हैं। यूएन के आंकड़ों को देखेंगे तो 2012 से लेकर 2013 तक 12 से 13 हजार रोहिंग्या मुस्लिम भारत में आकर अवैध रूप से बसे। लेकिन मौजूदा समय में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम भारत में है, ये कब और किस तरह आकर बसे इसे भी बताया जाए। बीजेपी इस मुद्दे पर सियासत कर रही है।


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