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भूपेंद्र सिंह, प्रदेश मंत्री, एबीवीपी
नई दिल्ली। बीएचयू में छेड़खानी के मामले को कुछ छात्र संगठन व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करने के अवसर के रूप में देख रहे है। यह बहुत ही निंदनीय है। जहां एक ओर छात्राएं सुरक्षा की मांग को लेकर शांति से बैठकर आंदोलन कर रही थी, विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता तो अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मामले का समाधान निकाल सकता था। लेकिन उसने बाहरी तत्वों को व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध करने का मौका दिया। उनकी इतनी औकात नही थी कि छात्राओं की इतनी भीड़ जुटा पाए। उनका मकसद छात्राओं को न्याय दिलाना नहीं बल्कि उन्हें बरगलाकर विश्वविद्यालय के छवि को बदनाम करना था। मैं उनसे यह पूछना चाहता हूं कि यदि वह छात्राओं की सुरक्षा को लेकर इतना ही जागरूक थे तो विश्विद्यालय के छात्र एवं छात्राओं के  सुरक्षा  के लिये कितनी बार विवि प्रशासन को लिखित रूप से समस्या से अवगत कराया है। विद्यार्थी परिषद पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं उसपर यह बताना चाहता हूं कि विद्यार्थी परिषद हमेशा छात्राओं के हित के लिए काम करती रही है। वह भी बहुत अनुशासनिक तरीके से, इस बात का सबूत है कि अभी कुछ दिन पहले ही 8 सितंबर को छात्र छात्राओं से जुड़ी समस्याओं को अवगत कराया था जिसमें छात्राओं की सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी कैमरा लगाने की भी मांग शामिल थी। प्रशासन को 15 दिन के अंदर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया गया था। परंतु प्रशासन की निष्क्रियता का परिणाम हमें 21 तारीख को देखने को मिला। इस घटना के प्रथम दिन से ही विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं  और स्वयं प्रदेश मंत्री ने सुरक्षा कर्मियों एवं अधिकारियों से बात कर उसका हल निकालने के लिए कहा इसके बाद भी प्रशासन को होश नहीं आया और इसका उत्तर छात्राओं पर लाठीचार्ज करा कर दिया गया।
वे अपनी नाकामियों को छुपाने में लग गए। परंतु अब विद्यार्थी परिषद छात्राओं के  साथ हुए बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज के विरोध में एवं उनके सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए लिए पूरे विश्वविद्यालय में ही नई बल्कि पूरे देश में आंदोलनरत है। और जब तक कार्रवाई नहीं होगी इस आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा
इस घटना को लेकर विद्यार्थी परिषद अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए चार सूत्रीय मांग किया है जो इस प्रकार है-
प्रथम यह कि पूरे घटना को ध्यान में  रखते हुए मानव संसाधन मंत्रालय  एक  तथ्य अन्वेषण समिति का गठन कर तय समय के अन्दर जांच कर दोषियों  के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए।
द्वितीय यह कि की विद्यार्थी परिषद राज्य सरकार से यह मांग करती है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए न्यायिक जांच कराए और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाय।
तीसरा यह कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हो रहे लगातार घटनाओं को रोक पाने में असफल चीफ प्रॉक्टर समेत पूरे प्रोक्टोरियल बोर्ड को बर्खास्त किया जाए।
चौथा और अंतिम मांग यह है कि छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए परिसर में सीसीटीवी एवम स्ट्रीट लाइट  की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से चालू की जाए।

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