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दिनाकरन गुट के 18 विधायक अयोग्य घोषित, पलनीस्वामी को राहत

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष पी। धनपाल ने एआईएडीएमके के टी.टी.वी. दिनाकरन समर्थक 18 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री ई.पलनीस्वामी के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके के धड़े को सदन में शक्ति परीक्षण की स्थिति से निपटने में बड़ी राहत मिलना तय माना जा रहा है। साथ ही माना जा रहा है कि सदन में बहुमत साबित करने की प्रक्रिया अब होनी तय है। टीटीवी दिनाकरन शशिकला के भतीजे हैं।
इन विधायकों के अयोग्य होने के कारण सदन में रिक्त स्थानों की लिखित जानकारी निर्वाचन आयोग को भी दी गई है। राज्य के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की है। वह मंगलवार सुबह चेन्नई पहुंच रहे हैं और इस बात की संभावना है कि वह विधानसभा का विशेष सत्र बुला कर मुख्यमंत्री को बहुमत साबित करने के लिए कहेंगे।
18 विधायकों की सदस्यता रद्द होने से 234 सदस्यीय विधानसभा (पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन से रिक्त सीट अभी खाली है) की संख्या घटकर 215 हो गई है। ऐसे में बहुमत के लिए 109 सदस्यों के समर्थन की जरूरत रह गई है और मुख्यमंत्री ई. पलनीस्वामी का दावा है कि उन्हें 114 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और उसकी सहयोगी पार्टियों के पास 98 विधायक हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने शुरूआत में दिनाकरन समर्थक एआईएडीएमके के 19 विधायकों को नोटिस जारी किया था। इनमें से एक एस.टी.के. जकाइयन पाला बदलकर पलनीस्वामी की तरफ आ गए और अयोग्य होने से बच गए। इन 18 विधायकों ने न तो पार्टी की सदस्यता छोड़ी है और न ही अन्य किसी पार्टी में शामिल हुए हैं। सामान्यतया इन्हीं आधारों पर किसी विधायक की सदस्यता रद्द की जाती है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए दिनाकरन ने बताया कि वह विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले के खिलाफ मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला बहुमत हासिल करने का शार्ट कट है। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि हमें स्टे मिलेगा। न्याय की जीत होगी। धोखाधड़ी कभी जीत नहीं सकती।
दिनाकरन ने मौजूदा हालात के लिए राज्यपाल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि सरकार के पास बीते महीने से बहुमत नहीं था। उन्होंने कहा कि इस सरकार को हटाने के बाद हम चुनाव में बहुमत हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि अभी उन्हें 21 विधायकों का खुला समर्थन हासिल है और इनके अलावा 10-12 उन्हें खामोशी से समर्थन दे रहे हैं।
संयुक्त एआइडीएमके ने पार्टी में महासचिव के पद को खत्म कर दिया है। पार्टी ने एलान किया है कि तमिलनाडु की पूर्व सीएम जे जयललिता हमेशा-हमेशा के लिए महासचिव रहेंगी। इस एलान के साथ ही जयललिता की सबसे करीबी दोस्त वीके शशिकला की पार्टी पर पकड़ का अंत हो गया है। अब वो पार्टी की अंतरिम महासचिव भी नहीं रहीं।
12 सितंबर को एआइडीएमके की बैठक में 2000 सदस्यों ने हिस्सा लिया था। डिप्टी सीएम ओ पनीरसेवलम को 11 सदस्यीय स्टीयरिंग कमेटी का चीफ बनाया था। इसके साथ ही सीएम ई पलानीसामी और ओ पनीरसेवलम गुट के विलय को औपचारिक रूप दिया गया है। ओ पनीरसेवलम गुट की मांग थी कि शशिकला को पार्टी से निकाला जाए। शशिकला ने जयललिता के निधन के बाद ओ पनीरसेवलम को सीएम पद से हटने पर मजबूर किया था। दोनों गुटों के विलय के साथ ये फैसला हुआ कि ओ पनीरसेवलम अब ई पलानीसामी की कैबिनेट में डिप्टी चीफ मिनिस्टर होंगे।

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