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देवेंद्र गौतम
नई दिल्ली। लद्दाख में चीन के घुसपैठिये सैनिकों ने भागते-भागते पत्थरबाजी शुरू कर दी जिसका जवाब भारतीय सैनिकों ने भी पत्थरबाजी से दी। इस घटना ने एक चर्चित उक्ति याद दिला दी। किसी मशहूर दार्शनिक ने कहा था कि दुनिया की अंतिम लड़ाई पारंपरिक हथियारों से लड़ी जाएगी। दुनिया के अधिकांश देशों के परमाणु हथियारों से लैश हो जाने के बाद इस उक्ति के चरितार्थ होने की संभावना बढ़ गई है। परमाणु हथियारों का उपयोग हमलावर को भी उतनी ही क्षति पहुंचाता है जितनी भुक्तभोगी को। इस बात को सभी समझते हैं। लिहाजा परमाणु हमले की पहल करने से कतरा रहे हैं। उत्तर कोरिया का तानाशाह शासक भी अमेरिकी द्वीप पर परमाणु हमले की धमकी देकर पीछे हट गया।
लेकिन परमाणु हथियारों के भय के बावजूद विभिन्न देशों के बीच आपस में तनाव तो बना ही रहता है। खासतौर पर पड़ोसी देशों के बीच। वे एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। धमकियां भी देते हैं लेकिन सीधी लड़ाई से बचने की कोशिश करते हैं। डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं करीब दो महीने से आमने सामने हैं। भारी तनाव बना हुआ है। धमकियों का आदान-प्रदान चल रहा है। युद्धाभ्यास के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है। मनोवैज्ञानिक तरीके से एक दूसरे को भयभीत करने की कोशिश की जा रही है लेकिन अभी तक किसी पक्ष की ओर से एक हवाई फायरिंग भी नहीं की गई। चीनी सैनिकों ने विभिन्न इलाकों से घुसपैठ की कोशिश की लेकिन भारतीय सेना की चौकसी के कारण कामयाब नहीं हो पाए। फिलहाल जो स्थिति बनी हुई है उसमें जंग के नाम पर छोटी-मोटी झड़पें हो सकती हैं या फिर पीठ के पीछे से आतंकी हमलों को अंजाम दिया जा सकता है। पाकिस्तान आतंकी हमलों में यकीन करता है तो चीन घुसपैठ में। पाकिस्तान कश्मीर में अलगाववादियों की सांठगांठ से पत्थरबाजों की फौज खड़ी कर रहा है। यानी बारूद के साथ पारंपरिक हथियार का इस्तेमाल कर रहा है। वह अपने आतंकियों के जरिए छोटे-छोटे हमले कराने की साजिश रच रहा है। आमने सामने के निर्णायक युद्ध से वह भी बच रहा है। छोटी लड़ाइयों में भी उसके पोषित आतंकी बारूद और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल जरूर कर रहे हैं लेकिन वायुसेना और नौसेना के उपयोग के हथियारों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। सीमा पर होने वाली हिंसक झड़पों में अब धीरे-धीरे पारंपरिक हथियारों का प्रयोग बढ़ेगा और संभव है कि मानव सभ्यता का अंतिम युद्ध दुनिया के हर हिस्से में पारंपरिक हथियारों से ही लड़ा जाए।

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