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चीनी झंडे को भी हटा लिया गया, कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की बड़ी जीत

नई दिल्ली। चीन की सेना अपने बुलडोजरों के साथ डोकलाम के विवादित इलाके से चली गई है और उन तंबुओं को भी हटा दिया है जो उन्होंने वहां गाड़े थे। भारतीय सेना के एक वरीय अधिकारी ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि विवादित इलाके में करीब 1700-1800 चीनी सैनिक थे और वे सभी वहां से चले गए हैं । इस विवादित इलाके में चीनी सैनिक सड़क बनाने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारी ने कहा, वे बुलडोजर ले जाए गए हैं, तंबुओं को हटा लिया गया है और चीनी झंडे को भी हटा लिया गया है।
विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया है कि हाल के हफ्तों में भारत और चीन के बीच डोकलाम की घटना के मद्देनजर कूटनीतिक स्तर पर वार्ता चल रही थीं। इस बातचीत में हमने अपने हित और चिंताओं पर बात की। इसके आधार पर यह सहमति बनी है कि डोकलाम से सेनाएं हटाई जाएंगी और यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ब्रिक्स  सम्मेलन के लिए प्रस्तावित तीन सितंबर से चीन दौरे के पहले इसे भारत की कूटनीतिक विजय के तौर पर देखा जा रहा है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा, डोकलाम में चीन द्वारा सड़क निर्माण के काम में लगाए गए बुलडोजर, टेंट व अन्य निर्माण सामग्री हटा ली गई है। इस मुद्दे पर भारत अपनी बात पर कायम था और पीछे हटने को तैयार नहीं था, चीन को स्पष्ट संदेश दे दिया गया था। आखिरकार दोनों देश समझौते तक पहुंच गए। इसे कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की बड़ी जीत बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक विदेश सचिव एस जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल की चीनी समकक्ष से लगातार इस मसले पर बातचीत हो रही थी। चीन के रुख देखकर पहले लग रहा था कि ब्रिक्स सम्मेलन के पहले कोई बात नहीं बनेगी लेकिन इससे ब्रिक्स का माहौल बिगड़ने का अंदेशा था। भारत और चीन दोनों ब्रिक्स के अहम साझेदार हैं। अगर दोनों देशों में गतिरोध नहीं टूटता तो प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिक्स यात्रा पर भी संशय हो सकता था।

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