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वैज्ञानिकों का दावा

नई दिल्ली। आॅस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मध्य आॅस्ट्रेलिया की प्राचीन अवसादी चट्टानों का विश्लेषण कर पता लगाया है कि पृथ्वी पर जीवन का विकास 65 करोड़ साल पहले शैवाल के उदय के साथ शुरू हुआ था। इस तरह वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझा लिया है कि प्राणी सबसे पहले पर धरती पर कैसे आए थे। एएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर जोशेन ब्रोक्स का कहना है कि इन चट्टानों को पीस कर चूर्ण बना दिया गया और इसमें से प्राचीन जीवों के अणुओं को निकाल लिया गया। उनका दावा है कि शैवाल के उदय ने पृथ्वी के इतिहास में सबसे गहन पारिस्थितिकी क्रांतियों को शुरू किया। इसके बिना इंसान और अन्य प्राणियों का अस्तित्व न होता। यह सबकुछ होने से 50 करोड़ साल पहले एक नाटकीय घटना हुई थी जिसे स्नोबॉल अर्थ कहा जाता है। ब्रोक्स ने कहा कि 50 करोड़ सालों तक धरती फ्रोजेन बनी रही। बड़े-बड़े ग्लेशियर पहाड़ी इलाकों में खड़े रहे और जब धरती गर्म होकर बर्फ पिघली तो सागरों का निर्माण हुआ। यह सब ग्लोबल वार्मिग के चलते हुआ।
उन्होंने कहा कि समुद्र में उच्च स्तर के पोषक हैं, जो वैश्विक तापमान को रहने लायक बनाते हैं। इनकी वजह से ही शैवालों के तेजी से फैलने लायक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ। ब्रोक्स ने कहा कि यह संक्रमण काल था, जिसमें बैक्टीरिया प्रभावी थे।ब्रोक्स के साथी शोधकर्ता अंबर जैरेट का मानना है कि मध्य आॅस्ट्रेलिया की इन चट्टानों में छोटे-छोटे जीवाश्म के संकेत मिले। आॅस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी रिसर्च स्कूल के अर्थ साइंस विभाग से पीएचडी ग्रेजुएट जैरेट ने कहा कि हमें शुरू में ही पता चल गया था कि हमने एक बड़ी खोज की है, जो स्नोबॉल अर्थ से लिंक है और इसके चलते ही सबसे गहन पारिस्थितिक क्रांतियां शुरू हुईं।

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