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इस वर्ष की पांचवी बड़ी रेल दुर्घटना का गवाह बना मुजफ्फरनगर

अंशुमान त्रिपाठी
नई दिल्ली। मोदी सरकार भले इसे स्वीकार न करे लेकिन सच यही है कि उसके कार्यकाल के तीन वर्षों में सबसे निराशाजनक प्रदर्शन रेल मंत्रालय का रहा है। इस विभाग ने रेलवे भाड़ा में चार-पांच बार बढ़ोत्तरी की। इतनी बढ़ोत्तरी अबतक की किसी सरकार ने इतनी कम अवधि में नहीं की थी। इस बढ़ोत्तरी के एवज में यात्रियों की सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ। ट्रेनों का विलंब से चलना पूर्ववत जारी रहा। पैंट्री के खाने का स्तर लगातार गिरता गया। यात्रियों को घटिया खाना दिया जाता है और मनमाना पैसा वसूला जाता है। ट्रेन में बिल देने का कोई प्रावधान नहीं है। पैंट्री की ठेकेदार कंपनी खाने की बिक्री के एवज में सरकार को कोई टैक्स अदा करती है या नहीं कोई देखने वाला नहीं है।

यात्रियों की सुरक्षा का आलम यह है कि अभी हाल में राजधानी एक्सप्रेस में नशा खिलाकर लाखों की लूटपाट की गई। खासतौर पर महिलाओं को निशाना बनाया गया। मुजफ्फरनगर के खतौनी में शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस में हुई भीषण दुर्घटना इस वर्ष की पांचवी बड़ी रेल दुर्घटना के रुप में दर्ज की गई। इसमें 13 डिब्बों के पटरी से उतरने और कई डिब्बों के एक दूसरे पर चढ़ जाने की खबर मिल रही है। मृतकों और घायलों का सही आंकड़ा अभी तक नहीं मिल पाया है। कोई 30 लोगों के मरने और 100 लोगों के घायल होने की खबर दे रहा है तो कोई 400 लोगों को घायल बता रहा है। भारतीय ट्रेन के 9 डिब्बों में कितने यात्री रहे होंगे इसका आमलोग तो अनुमान लगा सकते हैं लेकिन रेल विभाग और सरकारी महकमा के लिए यह काम मुश्किल है।

अबतक जो सूचनाए मिली हैं उनके मुताबिक अभियंत्रण विभाग खतौली में दो दिनों से पटरियों की मरम्मत का काम करा रहा था। लेकिन इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर को नहीं थी। स्टेशन मास्टर के मुताबिक उनसे मरम्मत की अनुमति नहीं ली गई थी। ट्रेन के गुजरने के समय वहां न तो सिग्नल काम कर रहा था और न ही सतर्कता के लिए कोई लाल झंडा लगाया गया था ताकि ट्रेन चालक उसे देखकर गाड़ी की रफ्तार कम कर ले। मरम्मत कार्य में लगे कर्मी भी वहां मौजूद नहीं थे। यह था सुरेश प्रभु के मंत्रालय का सूचना और समन्वय का तंत्र। विभिन्न विभागों के बीच संवाद के अभाव के कारण जिस ट्रेन को एहतियातन 10 किमी. की रफ्तार से गुजरना चाहिए था वह 100 किमी. के रफ्तार से गुजरी और भयानक दुर्घटना का सबब बनीं। कितने लोगों की जान गई कितने लोग अपंग हो गए इसका आंकड़ा आना अभी बाकी है। रेलमंत्री ने जांच का आदेश, दोषियों को कड़ी सजा और भुक्तभोगी परिवारों को मुआवजे की घोषणा कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। प्रधानमंत्री ने संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने तत्काल बचाव कार्य के साधन जुटा दिए। स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक अमले ने अपने स्तर से जो संभव था किया। लेकिन मंत्री जी को अपनी भूमिका में कोई कमी नजर नहीं आई। रेल सार्वजनिक यातायात का सबसे बड़ा, सबसे जरूरी और सबसे विश्वसनीय नेटवर्क रहा है। इस तरह की लापरवाहियां उससे भी लोगों का भरोसा खत्म न कर दें मोदी सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए। 

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