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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की फौरी ब्याज दर में कमी किए जाने के निर्णय का वित्त मंत्रालय ने स्वागत किया है। उसने कहा कि रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती मुद्रास्फीति को नीचे रखते हुए देश की क्षमता के अनुसार मजबूत वृद्धि हासिल करने की परिस्थिति कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रिजर्व बैंक ने गत अक्तूबर के बाद रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटा कर छह प्रतिशत रखा है। रेपो वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को धन एक दिन के लिए नकदी उधार देता है। यह दर अब साढ़े छह साल के न्यूनतम स्तर पर आ गयी है।
इससे पहले, अक्तूबर 2016 में रेपो दर में कटौती की गयी थी। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार रेपो में कमी का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रास्फीति तथा आर्थिक परिदृश्य संबंधी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के बयानों तथा आकलन पर गौर किया है। गर्ग ने कहा, ह्यह्यदेश की संभावनाओं तथा स्थिरता के साथ नरम मुद्रास्फीति के साथ मजबूत आर्थिक वृद्धि हासिल करने की दिशा में उपयुक्त मौद्रिक परिस्थिति बनाने को लेकर रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती के रिजर्व बैंक के निर्णय का, एक जरूरी महत्वपूर्ण कदम के रूप में हम स्वागत करते हैं।
 खुदरा मुद्रास्फीति के जून में ऐतिहासिक रूप से 1.54 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर आने के बीच सरकार आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये नीतिगत दर में कटौती की वकालत करती रही है। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में एमपीसी की आज सम्पन्न हुई दो दिवसीय बैठक में मौद्रिक नीति निर्णय पर पहुंचा गया। मौद्रिक नीति समिति ने खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत पर रखने के मद्देनजर अपना नीतिगत रूख तटस्थ बनाए रखने और आने वाले आंकड़ों का इंतजार करने का निर्णय किया है।

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