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नई दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में मौजूद करीब 200 दर्शक उस समय मन्त्रमुग्ध से हो गए जब ओडिसी की युवा नृत्यांगना पीहू श्रीवास्तव ने  'भूमि प्रणाम' कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दी’ भूमि प्रणाम का आयोजन ओडिसी की मशहूर नृत्यांगना गुरु अल्पना नायक की वरिष्ठ शिष्या पीहू श्रीवास्तव के मंच प्रवेश के लिए किया गया था’ हालांकि युवा पीहू की यह पहली एकल नृत्य प्रस्तुति थी, लेकिन करीब एक घंटे तक पीहू ने अपने सधे हुए बेहतरीन नृत्य कौशल से दर्शकों को यह महसूस ही नहीं होने दिया कि वो अपनी पहली एकल प्रस्तुति दे रही हैं।’
कार्यक्रम की शुरूआत गुरुवंदना से हुयी जब पीहू ने अपनी गुरु अल्पना नायक से आशीर्वाद लिया और फिर मंगलाचरण और खमाज राग पर आधारित खमाज पल्ल्वी की प्रस्तुति दी।’ ओडिसी नृत्य में सबसे अहम होता है अभिनय जहां नर्तक अपनी आंखों, हथेलियों और गर्दन की भाव भंगिमाओं से अपने उदगार प्रकट करता है।’ पीहू ने अपनी 'अभिनय' कला की दक्षता का परिचय देते हुए 'लीला निधि' की प्रस्तुति दी।’
इसके बाद पीहू ने पद्म विभूषण गुरु केलुचरण महापात्र के द्वारा कोरियोग्राफ किये गए प्रसिद्द 'दशावतार' नृत्य की प्रस्तुति दी और अंत में 'मोक्ष' की।’
'अल्पना' नृत्य संस्थान से जुड़ी पीहू इससे पूर्व श्रीलंका, गोवा , भुवनेश्वर सहित दिल्ली में कई जगह समूह नृत्य प्रस्तुति दे चुकी हैं और कई नृत्य प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी जीत चुकी ह।ैं’ पीहू को  भारत सरकार के संस्थान सीसीईआरटी की प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य की स्कालरशिप के लिए भी उन्हें चुना गया है।’
'भूमि प्रणाम' में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय , नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा, आइआइएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश, डीडी न्यूज की महानिदेशक वीणा जैन  के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा विशिष्ठ अतिथि के तौर पर उपस्थित थे।’ कार्यक्रम के अंत में सभी विशिष्ठ अतिथियों ने पीहू के नृत्य की सराहना की।’ संबित पात्रा ने पीहू को ओडिसी नृत्य की नई खोज बताते हुए कहा कि जब भी वो नृत्य करेंभगवान कृष्ण की तरह सब कुछ भूल कर नृत्य करें।’ गुरु अल्पना नायक ने इस अवसर पर कहा कि पीहू की प्रतिभा और नृत्य से वे बेहद प्रभावित हुई हैं और पीहू अब शास्त्रीय नृत्य के खुले आकाश में उड़ने के लिए पूरी तरह से तेयार हैं।’

     इस अवसर पर एक स्मारिका का लोकार्पण भी किया गया , जिसमें पीहू की उपलब्धियों को संगृहीत किया गया है ’

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