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अमेरिका, कनाडा और आॅस्ट्रेलिया तक फैला है बाबा का साम्राज्य

चंडीगढ़। साध्वी यौन शोषण विवाद में सीबीआई स्पेशल कोर्ट के फैसले की वजह से डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक फिर चर्चा में हैं। उनके समर्थकों के आगे हरियाणा सरकार की पुलिस व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी सरकार बेबस ही नजर आ रही है।
ऐसा सिर्फ राम रहीम के समर्थकों की संख्या की वजह से है। इसीलिए हरियाणा और पंजाब की सरकारें बाबा राम रहीम से रिश्ता बनाकर चलती हैं। उनका साम्राज्य सिर्फ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल तक ही सीमित नहीं है। बल्कि अमेरिका, कनाडा और आॅस्ट्रेलिया में भी फैला हुआ है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि डेरा के अनुयायी बढ़ते क्यों चले गए।
गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सौदा के तीसरे गुरु हैं। उन्हें 23 सितंबर 1990 को एक यहां की गद्दी सौंपी गई थी। जबकि डेरे की स्थापना 1948 में शाह मस्ताना महाराज ने की थी। इसके लिए हरियाणा के सिरसा को चुना गया। शाह मस्ताना बलूचिस्तान के कालकट जिले के रहने वाले थे। उन्होंने एक झोपड़ी से आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सत्संगों का आयोजन करके इसकी शुरूआत की थी।
उनके बाद गद्दी संभाली सतनाम महाराज ने। उनका जन्म सिरसा के जलालाना नामक स्थान पर हुआ था। उनके समय में भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी थी। लेकिन बाबा राम रहीम के डेरा की गद्दी संभालते ही अनुयायियों की संख्या करोड़ों की तरफ बढ़ने लगी। डेरा के सपोर्ट का आधार सिख दलित बताए जाते हैं। डेरा सभी धर्मों का सम्मान करता है। भेदभाव को खत्म करने की वकालत करता है। ऊंच-नीच, जात-पात व गरीबी-अमीरी की दरार से ऊपर उठने के इसके एजेंडे की वजह से ही दलित और पिछड़े वर्ग के लोग इससे जुड़ते चले गए। गद्दी मिलने के बाद गुरमीत राम रहीम दूसरे संतों की तरह बाबाओं के पारंपरिक वेशभूषा में नजर नहीं आए। उन्होंने संतों के पहनावे के सांचे को तोड़ते हुए मॉडर्न ड्रेस पहनी, फिल्मों में एक्टिंग की, डांस किया, गाने गाए और स्पोर्ट्स बाइकें चलाई। वह छोटे परदे तक सीमित नहीं रहे। उनके अनुयायियों ने उन्हें ईश्वर के दूत के रूप में न केवल फिल्मों में देखा बल्कि असल जिंदगी में भी उन्हें यही माना।
वह अपने समर्थकों के लिए भले ही ईश्वर के दूत हैं लेकिन और लोगों के लिए उनकी शख्सियत और उनकी दुनिया किसी रहस्य से कम नहीं है। अपने साथ युवाओं को जोड़ने के लिए उन्होंने यूथ और वुमेन एंपावरमेंट कार्यक्रम चलाए। सामाजिक समरसता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों की वजह से उनके साथ वह लोग जुड़ते चले गए जो कहीं न कहीं समाज में अपने आपको हाशिए पर पाते हैं। नशामुक्ति, रक्तदान और स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रमों से लोगों को अपनी ओर खींचा। सिरसा में काम कर चुके चंडीगढ़ के एक पत्रकार बताते हैं कि डेरे से महिलाओं के जुड़ने का सबसे बड़ा आधार उनके पतियों का शराब छूटना रहा है। यह काम राम रहीम ने किया।
तलाकशुदा युवतियों की शादी शुरू करवाई। लड़के से ही वंश चलता है, इस भ्रम को दूर करके लड़की शादी करके दूल्हा घर लाएगी व लड़की से वंश चलेगा। इस बात का प्रचार कर अपने को समाज सुधारक के तौर पर पेश करने की कोशिश की। इस वक्त डेरा सच्चा सौदा के करीब 5 करोड़ अनुयायी होने दावा किया जाता है। बाबा जिस पार्टी की तरफ इशारा करते हैं उसी को उनके समर्थकों का वोट जाता है। उनकी बाकायदा एक पॉलिटिकल विंग बनी हुई है। कई राज्यों के मंत्री और रसूखदार नेता बाबा के दरबार में सिर झुकाते रहे हैं।
जब सरकार सफाई में फेल हो जाती है तब राम रहीम के भक्तों की फौज को बुलाती है। उनके लाखों भक्त एक-दो दिन में ही किसी शहर को चमकाने का माद्दा रखते हैं। वे अब तक आठ राज्यों के 30 शहरों में सफाई अभियान चला चुके हैं। बाबा की गिनती उन चंद लोगों में होती है, जिसे जेड प्लस सिक्योरिटी मिली हुई है। अकेले सिरसा में ही उनका साम्राज्य करीब सात सौ एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। ट्विटर पर उनके 37 लाख से भी अधिक फॉलोअर हैं, लेकिन खास बात यह है कि वह किसी को भी फॉलो नहीं करते। राम रहीम का जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरूसर मोदिया नामक जगह पर एक जाट सिख परिवार में हुआ। उन्होंने अन्य संतों की तरह परिवार नामक संस्था नहीं छोड़ी। डेरा प्रमुख की दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी का चरणप्रीत और छोटी का नाम अमरप्रीत है।

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