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वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी गिरकर 5.7 पर पहुंची

नई दिल्ली। नोटबंदी की घोषणा के बाद अर्थशास्त्रियों ने जो आशंका व्यक्त की थी वह सच साबित हो रही है। जीडीपी में दो प्रतिशत गिरावट की भविष्यवाणी की गी थी जो सही साबित हो रही है। नोटबंदी से काला धन तो बाहर नहीं आया लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका जरूर लगा है। अप्रैल से जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भारी गिरावट आई है। इस तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.7 फीसदी तक सिमट गया। पिछले तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी थी। इससे भी पहले जीडीपी की रफ्तार 7.9 फीसदी थी।
केंद्र सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में जीडी पी की विकास दर धीमी हो गई है। पिछली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी थी। इससे पिछले साल जीडीपी की रफ्तार 7.9 फीसदी थी।
सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में जीडीपी की विकास दर धीमी हो गई है।
इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 0.4 फीसदी की कमी आई है। जीडीपी विकास दर के आंकड़े ऐसे समय में आए हैं, जब आरबीआई की नोटबंदी को लेकर जारी रिपोर्ट पर हंगामा हो रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि नोटबंदी से जीडीपी को कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ है। ऐसे में देखना होगा कि सरकार जीडीपी की विकास दर धीमी होने के लिए क्या वजह बताती है?
जीडीपी के जून के आंकड़ों ने रॉयटर्स पोल के अनुमान को भी झूठा साबित कर दिया है। 40 अर्थशास्त्रियों के इस पोल में उम्मीद जताई गई थी कि भारत की जीडीपी 6.6 फीसदी की दर से आगे बढ़ेगी। रॉयटर ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा था कि जीएसटी की वजह से कंफ्यूजन बरकरार है। ऐसे में इसका सीधा असर जीडीपी पर पड़ सकता है।
आॅयल प्रोड्यूसिंग ब्लॉक ओपेक ने उम्मीद जताई है कि जुलाई से दिसंबर के बीच जीडीपी की विकास दर में सुधार आएगा। ओपेक ने जुलाई में जारी अपनी मासिक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक विकास दर धीमी होने के पीछे नोटबंदी सबसे बड़ा फैक्टर है। इसमें कहा गया है कि नोटबंदी का असर कुछ समय के लिए ही रहेगा। साल के दूसरी छमाही में जीडीपी की स्थिति सुधर जाएगी और विकास दर में सुधार आएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

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