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अंशुमान त्रिपाठी
नई दिल्ली। उमड़ती भीड़ ने इसबार दो हैरत-अंगेज़ काम किए। एक भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता नेता के आह्वान पर पटना के गांधी मैदान को भर दिया और एक बलात्कारी बाबा को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। पूरी राजसत्ता के सामने चुनौती खड़ी कर दी। इस भीड़ के मन में उन युवतियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं उभरी जो बाबा की हवस का शिकार हुईं। जो उनके ही घरों की बेटियां थीं और जो पिछले पंद्रह वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। डेरे के अंदर के एक पर एक हैरत भरे रहस्य उजागर हो रहे हैं और समर्थकों की सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बाबा जो भी करें सब जायज है। आखिर सोच की धरातल कहां से खिसककर कहां आ चुकी है।

बिहार के लोगों ने भी कभी इस बात पर नाराजगी नहीं व्यक्त की कि उनके वोट पर चुनाव जीतकर लालू बिहार के विकास की जगह घोटालों को अंजाम देते रहे और अब उनके उत्तराधिकारी भी उसी रास्ते पर चल पड़े हैं। कोई यह समझने को तैयार नहीं कि जातिवाद और सांप्रदायिकता दोनों ही उन्माद से संचालित होते हैं। समाज में एक ही किस्म की घृणा का संचार करते हैं। फिर एक भला और एक बुरा क्यों?
डेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरमीत सिंह राम रहीम को बलात्कार का दोषी ठहराए जाने से लेकर सज़ा सुनाए जाने तक उनके कथित समर्थकों ने आतंक का माहौल बनाए रखा। सुरक्षाकर्मियों की लाठी और गोलियां खाईं। दर्जनों लोगों ने बलात्कारी बाबा के लिए अपनी जान दे दी। घायल होकर अस्पताल पहुंच गए। सत्ता में शामिल कुछ बड़े नेताओं का यह भी बयान आया कि समर्थकों की संख्या को दोखते हुए उन्हें दोषी करार नहीं देना चाहिए था। यानी राजसत्ता को एक बलात्कारी के सामने समर्पण कर देना चाहिए था। एक बलात्कारी के समर्थकों के उपद्रव के कारण हरियाणा के तमाम स्कूल कालेज बंद कर दिए गए। बसों और ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। पांच राज्यों में हाई अलर्ट जारी हो गया। कहीं कर्फ्यू तो कहीं धारा 144 लगाना पड़ा। सात समंदर पार के कुछ देशों को भी हाई अलर्ट मोड में जाना पड़ा।
जो गांधी मैदान में जुटी थी उस भीड़ को लालू और उनके परिजनों के भ्रष्टाचार से कोई फर्क नहीं पड़ा था। उसके बल पर ही लालू जैसे लोग अपने कुकर्मों को धर्म निरपेक्षता की चादर से ढक देने और सर उठाकर चलने की ताकत प्राप्त करते हैं। भले ही यह भीड़ भी जातिवाद के नाम पर बांटो और राज्य करो फार्मूले के तहत इकट्ठी की गई हो।

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