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देवेंद्र गौतम
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की विफलताओं से झल्लाकर कह डाला कि लोग बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी सरकार पर न छोड़ दें। निश्चित रूप से बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेवारी उनके मां-बाप की होती है। सरकार की नहीं। लेकिन उनकी शिक्षा, चिकित्सा, पोषण आदि की जिम्मेवारी सरकार की ही होती है। और सरकार अपनी जिम्मेवारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकती। गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कालेज हास्पीटल जहां पिछले आठ माह के दौरान 1309 बच्चों की मौत हो चुकी है। उसकी व्यवस्था को सुदृढ़ रखने का जिम्मा सरकार का नहीं तो किसका है? जुलाई महीने में यह बात सामने आई थी कि वहां कमीशन के चक्कर में आक्सीजन आपूर्ति करने वाली कंपनी का लाखों का बिल लंबित पड़ा है। उसके  बिल का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। आक्सीजन सिलिंडर की नियमित आपूर्ति की अभी तक व्यवस्था नहीं हुई है। योगी जी बतलाएं कि यह काम क्या बच्चों के मां-बाप का है?

अभी तक बच्चों की मौत का जो आंकड़ा सामने आया है वह सिर्फ एक सरकारी अस्पताल का है। योगी जी को पता नहीं इस बात की जानकारी है या नहीं कि सरकारी अस्पतालों में गरीब तबके के लोग इलाज के लिए आते हैं। आर्थिक रूप से सक्षम घरों के बच्चों का इलाज सरकारी नहीं निजी अस्पतालों में होता है। जो निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च वहन कर सकते हैं वे सरकारी अस्पतालों में झांकने भी नहीं आते। सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा नहीं है। गरीब लोग भरोसा नहीं होने पर भी आर्थिक कमजोरी के कारण वहां जाते हैं। अब योगी जी बताएं कि सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था को भरोसेमंद बनाने की जिम्मेवारी सरकार की नहीं तो भला किसकी है?
बरसात के मौसम में जो संक्रामक बीमारियों का प्रकोप होता है नि:संदेह उसमें स्वच्छता के प्रति लापरवाही की भूमिका होती है। स्वच्छता के प्रति नागरिक जिम्मेवार होते हैं। लेकिन उनकी जिम्मेवारी अपने घरों तक ही सीमित होती है। योगी जी को संभवत: पता होगा कि गली, मुहल्लों और सड़कों की सफाई व्यवस्था की जिम्मेवारी नगर निकायों की होती है। उन्हें कुछ कर वसूलने का अधिकार होता है लेकिन उनका वित्तीय पोषण राज्य सरकार को ही करना होता है। दूसरी बात यह कि संक्रामक बीमारियों का प्रकोप हर वर्ष एक खास महीने में होता है। उससे बचाव की तैयारी करनी होती है। जनता उसमें सहयोग कर सकती है लेकिन इसकी तैयारी सरकार को ही करनी होती है। अब योगी जी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि सरकारी तंत्र से कहीं चूक हुई है। समस्या यह है कि प्राय: सत्ता में आने के बाद नेता अपने अधिकारों का भरपूर प्रयोग करते हैं लेकिन कर्तव्यों से सिी तरह पल्ला झाड़ते हैं जिस तरह योगी आदित्यनाथ झाड़ रहे हैं।

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