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जांच के आदेश, दावा-आक्सीजन की कमी से नहीं, इन्सेफ्लाइट्स से हुई बच्चों की मौतें

गोरखपुर। गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अबतक बच्चों की मौत का आंकड़ा 70 पार कर चुका है। सरकार का कहना है कि इस दर्दनाक हादसे की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। 33 बच्चों की मौत की खबर मिलने के बाद सच्चाई जानने सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा आज गोरखपुर पहुंचे। अस्पताल पहुंचते ही सीएम योगी फफक पड़े। दौरा करने के बाद सीएम योगी ने कहा कि इस पूरी घटना की जांच बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पूरी घटना के हर संभव मदद का भरोसा दिया है। सीएम योगी ने इस घटना के बाद मीडिया को जानकारी दी और इन्सेफ्लाइट्स का जिक्र खासतौर पर किया।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बच्चों के लिए उनसे ज्यादा संवेदनशील कोई और नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जाएगी और जो कोई भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने जानकारी दी कि पीएम मोदी बच्चों की मौत को लेकर काफी चिंतित हैं और केंद्र ने राज्य को पूरी मदद मुहैया कराने का वादा किया है।
इससे पहले अस्पताल पहुंचते ही पीड़ितों को देखकर सीएम योगी भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे। योगी को कार से मेडिकल कालेज के नेहरु अस्पताल की ओर जाते वक्त अपने आंसू रोकने की कोशिश करते और आंसू पोंछते देखा गया। योगी मेडिकल कालेज में मौजूद अधिकारियों से पूरे प्रकरण की सचाई की जानकारी ली।
वहीं गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में रविवार आज सुबह ही  इंसेफलाइटिस से एक और बच्चे की मौत हो गई। अब तक इस अस्पताल में मरने वाले लोगों की संख्या 70 के पार हो गई है। बीआरडी अस्पताल में एक के बाद एक हो रही मौतों पर सफाई देने आए मंत्रियों का दावा था कि किसी भी मरीज की मौत आॅक्सीजन की कमी से नहीं हुई।  ऐसे में एक और बच्चे की मौत ने सरकार के दावों की हकीकत सामने ला दी है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत को लेकर सरकार ने शनिवार की देर शाम स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आॅक्सीजन की कमी से गोरखपुर में कोई मौत नहीं हुई है। अगस्त में अलग-अलग दिनों में तिथिवार हुई मौतों का आंकड़ा पेश करते हुए कहा है कि पिछले सालों में अगस्त में हुई मौतों के आंकड़ों के सापेक्ष इस माह मौतें कम हुई हैं।
बावजूद इसके मुख्यमंत्री के निर्देश पर गोरखपुर गए दो मंत्रियों की रिपोर्ट के आधार पर बीआरडी के प्रधानाचार्य को सरकार ने निलम्बित कर दिया है। साथ ही मीडिया में आई रिपोर्ट व अन्य स्त्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जो आक्सीजन की कमी व आपूर्ति करने वाली कंपनी की भूमिका आदि की विस्तृत जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले गोरखपुर से लौटे चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन और अनुप्रिया पटेल के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा भी की। हालात का पूरा जायजा लेने के बाद देर शाम आनन-फानन में बुलाई गई प्रेस कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने सबसे पहले कहा कि  बच्चों की मौत को लेकर मीडिया में आए अलग-अलग आकड़ों ने भ्रम की स्थिति पैदा की है।
अलग-अलग अखबारों व चैनलों ने अलग-अलग आंकड़े दिए हैं। उन्होंने अपील की कि मीडिया किसी भी घटना की सही तथ्यों को रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या सचमुच आॅक्सीजन से मौतें हुई है? मौतों के सही आंकड़े क्या है इसमें किसकी लापरवाही है इसका पता लगाने के लिए उन्होंने तत्काल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री को गोरखपुर भेजा। इसे पहले घटना का पता चलते ही वहां के डीएम को मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए।
उन्होंने कहा कि एक माह में वो दो बार वहां गए और समीक्षा कर सारे जिम्मेदारों से व्यक्तिगत रूप से पूछा था कि और किसी प्रकार की कोई समस्या या मदद की बात हो तो वे बताएं लेकिन किसी ने भी कुछ नहीं बताया। श्री योगी ने कहा कि आॅक्सीजन की कमी से मौत का मतलब एक जघन्य कृत्य है। लिहाजा आॅक्सीजन की आपूर्ति में कंपनी की भूमिका की जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता एक कमेटी गठित कर दी गई है जो एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसे सरकार कतई बख्शेगी नहीं उसे कठोर दण्ड दिया जाएगा।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि आॅक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है। उन्होंने पिछले तीन सालों का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि इस बार भी वहां अलग-अलग कारणों मसलन प्रीमेच्योर डिलीवरी, चेस्ट इन्फेक्शन, निमोनिया समेत कुछ अन्य बीमारियों से अलग-अलग दिनों में मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के अगस्त में बीआरडी मेडिकल कालेज में 567 मौतें हुई थीं। इसका औसत रोज 22 मौतों का है। इसी तरह वर्ष 2015 में रोजाना 22 के औसत से 668 मौतें हुईं। वहीं 2016 में अगस्त में 587 मौतें हुईं जिसका औसत 19 से 20 मौतों का रहा।

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