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नई दिल्ली। भारत ने सुकना स्थित 33वीं कोर से सैनिकों को सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर तैनात करना शुरू कर दिया है। भारत, चीन और भूटान के तिराहे पर स्थित डोका ला पठार पर गतिरोध को लेकर चीन के धमकी भरे बयानों के बीच यह रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि सेना ने डोका ला की तरफ सैनिकों के बढ़ने की खबरों को खारिज किया है। बुधवार को आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पूर्वी कमान के सैन्य सूत्रों ने कहा कि सिलीगुड़ी में 33वीं कोर की तीन डिवीजनों से भारत-चीन सीमा पर तैनाती की गई है।
सैनिकों की तैनाती की यह प्रक्रिया 20-25 दिन पहले शुरू हुई थी। कोर की महत्वपूर्ण टुकड़ियों ने सैन्य आॅपरेशन की दृष्टि से महत्वपूर्ण जगहों पर मोर्चा भी संभाल लिया है। सिक्किम के उत्तरी और पूर्वी इलाकों में सीमा से 500 मीटर से दो किलोमीटर दूरी के स्थानों पर इन सैनिकों की तैनाती की गई है। कई यूनिटों को ऊपरी इलाकों तक पहुंचने के लिए चार दिनों का लिखित नोटिस दिया गया है। जबकि कुछ को तो छह घंटे के नोटिस पर ही तैनाती स्थल की ओर मोर्चा संभालने को कहा गया। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम बेहद गोपनीय तरीके से उठाया गया, ताकि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई सुर्खियां नहीं बने। सैनिकों की रवानगी के काफी दिनों बाद मध्यम स्तर के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी सात अगस्त को दी गई।
वहीं भारतीय सेना के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना डोका ला में नो वार-नो पीस मोड में है। सैन्य मामलों में नो वार-नो पीस का दुश्मन के साथ आमने-सामने या टकराव की स्थिति है। सेना ने सीमा पर सैनिकों और हथियारों की विशेष तैनाती से जुड़े सवाल पर कहा कि जो भी गतिविधि है वह मरम्मत के उद्देश्य से जुड़ी हुई है। सेना ने एक बयान में कहा कि डोका ला में दोनों तरफ से यथास्थिति बनी हुई है। जहां तक सिक्किम में चीन सीमा की तरफ सेना के बढ़ने की बात है तो यह एक नियमित प्रक्रिया है। सेना का कहना है कि सेना के अपने नियमित कार्यक्रम चलते रहते हैं जिसमें जवानों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। इसका डोका ला की घटना से कोई संबंध नहीं है। दोनों देशों की सेनाएं डोका ला क्षेत्र में करीब दो माह से आमने-सामने हैं।

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