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नयी दिल्ली। स्टेट बैंक आॅफ इंडिया ने मिनिमम बैलेंस के नाम पर खाताधारियों से 235.06 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है। यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली है। बैंक द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक, कुल 388.74 लाख खातों से जुर्माने की अच्छी-खासी राशि वसूली गयी है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एसबीआई को यह फायदा हुआ है।
मध्यप्रदेश के नीमच में रहनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने आरटीआई के तहत एसबीआई से सवाल पूछा था कि मिनिमम बैलेंस नहीं रखने वाले खाता धारकों से बैंक ने कितना जुर्माना वसूल किया है। एसबीआई ने गौड़ को पिछले हफ्ते भेजे गये जवाब में बताया कि 30 जून 2017 को खत्म हुई तिमाही के दौरान मिनिमम बैलेंस नहीं रखने के चलते वसूली गयी राशि 235.06 करोड़ रुपये है। यह रकम 388.74 लाख खाता धारकों से वसूल की गयी है।
हालांकि, आरटीआई के तहत बैंक की ओर से भेजे गये जवाब में यह साफ नहीं किया गया है कि तय मासिक औसत जमा राशि नहीं रखे जाने पर किस श्रेणी के खातों से शुल्क कटौती की गयी है।
इस बारे में चन्द्रशेखर गौड़ का कहना है कि इस वसूली से निम्न आय वर्ग के वे ग्राहक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो एसबीआई में बचत खातों में छोटी-छोटी रकम जमा करते और निकालते रहते हैं।
गौड़ ने कहा कि एसबीआई को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के हितों में इस शुल्क वसूली के नियमों की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि इस तबके के ज्यादातर ग्राहक अपने खातों में लंबे समय तक बड़ी रकम जमा नहीं रख पाते हैं। नतीजतन उनके खातों से राशि कटती रहती है।
चंद्रशेखर गौड़ की आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को सेविंग अकाउंट्स में जमा मिनिमम बैलेंस को लेकर कोई निर्देश नहीं दिये हैं। लेकिन, केंद्रीय बैंक ने इन खातों में न्यूनतम जमा राशि नहीं रखने पर ग्राहकों से जुमार्ने वसूलने को लेकर बैंकों के लिए कुछ शर्तें जरूर रखी हैं।

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