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- ठेकेदार कम्पनियों की संस्था ‘इरीपा’ ने किया ऐलान
- पुराने ठेकों पर जीएसटी लागू करने का कर रहे हैं विरोध
- कहा, बढ़ा टैक्स या तो वापस लो या फिर रेलवे दे

अजय औदीच्य
गाजियाबाद। निर्माण क्षेत्र में लगे सरकारी ठेकेदारों के लिये जीएसटी कानून बड़ी सिरदर्दी लेकर आया है। देश भर में रेलवे की निर्माणाधीन एक लाख करोड़ रुपए की परियोजनाओं को ठेकेदारों ने ठप्प करने की चेतावनी दी है। रेलवे की परियोजनाओं के निर्माण और विस्तारीकरण का काम कर रहीं कम्पनियों की संस्था ‘इंडियन रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन’ यानी ‘इरीपा’ ने ऐलान किया है कि अगर 10 अगस्त तक केन्द्र सरकार ने पुरानी निविदाओं पर चल रहे निर्माण कार्यों को जीएसटी के दायरे से अलग नहीं किया या फिर जीएसटी के तहत लिये जाने वाली रकम का भुगतान रेलवे ने खुद करने का सिलसिला शुरू नहीं किया तो 20 अगस्त से रेल परियोजनाओं का काम अनिश्चितकाल के लिये रोक दिया जाएगा।
गाजियाबाद मीडिया सेन्टर में इरीपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकिशन शर्मा ने कहा कि देश में 15 हजार से ज्यादा रेलवे ठेकेदार कम्पनियां हैं। पहले सभी 16 जोनों में ठेकेदारों के अलग-अलग संगठन थे, लेकिन जीएसटी आने के बाद सभी ने मिलकर इरीपा का न केवल गठन किया, बल्कि सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने का भी निर्णय लिया है। इरीपा के तमाम अन्य पदाधिकारियों के साथ प्रैसवार्ता करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि रेल परियोजनाओं के निर्माण में लगी ठकेदार कम्पनियों से पहले अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टैक्स लिये जाते थे, जो अधिकतम चार प्रतिशत थे। इस टैक्स के आधार पर ही निविदाएं भी डाली और स्वीकार की गईं। अब एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
बालकिशन शर्मा ने कहा कि 18 प्रतिशत टैक्स देकर पुराने कार्य करना किसी सूरत में संभव नहीं है। उन्होंने मांग की कि या तो सरकार बढ़े टैक्स के आधार पर ठेकों की लागत राशि बढ़ाए या फिर एक जुलाई से पहले की निविदाओं को जीएसटी के दायरे अलग करे। यदि सरकार दोनों काम नहीं कर सकती तो रेलवे बढ़े टैक्स का भुगतान करे। प्रैसवार्ता में इरीपा के महासविच राजेश मेनघानी ने कहा कि जीएसटी के लागू होने के बाद रोड़ी-बदरपुर, सीमेन्ट, स्टील, पत्थर और इलेक्ट्रिक गुड्स सभी के 20 से 25 प्रतिशत तक रेट बढ़ गए हैं। लिहाजा पुराने कांट्रैक्ट्स पर जीएसटी देकर काम करना किसी के लिये मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी परियोजनाओं का निर्माण करने वाली ठेकेदार कम्पनियां सर्विस प्रोवाइडर हैं न कि गुड्स प्रोवाइडर। हम सरकार को सेवा दे रहे हैं और रेलवे यात्री किराया व माल भाड़े पर टैक्स ले रहा है। नैतिक रूप से भी सरकार जीएसटी के तहत बढ़ा टैक्स लेने की हकदार नहीं है। इरीपा के अध्यक्ष व महासचिव ने समस्या के निदान के लिये कन्द्र सरकार को 19 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया और कहा कि अगर पुरानी निविदाओं को जीएसटी के दायरे से अलग नहीं किया गया तो 20 अगस्त से देश भर में रेलवे की सभी परियोजनाओं पर काम रोक दिया जाएगा और निर्माण कम्पनियां बेमियादी हड़ताल पर चली जाएंगी।
इरीपा के पदाधिकारियों ने बताया कि फिलहाल देश में रेलवे की एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें आरओबी व फ्लाईओवर, अंडरपास निर्माण से लेकर रेल लाइनें बिछाने और उनके दोहरीकरण जैसे काम शामिल हैं। रेलवे स्टेशनों के सौंदर्यीकरण के भीकाम चल रहे हैं। इन सभी परियोजनाओं मंे करोड़ों मजदूर और कर्मचारी लगे हैं। 20 अगस्त से सभी हड़ताल पर चले जाएंगे और रेल परियोजनाएं ठप्प कर दी जाएंगी। प्रैसवार्ता में इरीपा के पदाधिकारी बिहारीलाल मंघनानी, अशोक कुमार पाठक, पवन गुलाटी, महेश कुमार, श्रीगोपाल तांतिया, रामसुजान गुप्ता, के सुन्दर राव, संजीव मित्तल, केशव राघव, महेन्द्र प्रसाद गुप्ता और बीडी शर्मा भी मौजूद थे।

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