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नई दिल्ली। सिक्कम के डोकलाम को लेकर चीन के सख्त रुख ने भारत के लिए पाकिस्तान से लगती पश्चिमी सीमा के साथ-साथ पूर्वी सीमा पर भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।  सीमा पर एक सामान्य झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते इस हद तक पहुंच गए हैं कि खुलेआम युद्ध की बातें की जा रही हैं।  अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन और भारत समय-समय पर एक-दूसरे पर तल्ख हुए हैं लेकिन इस बार पड़ोसी देश ने जो दांव चला है वो भारत के लिए इसलिए गंभीर खतरा है क्योंकि अगर ड्रैगन अपने मकसद में कामयाब रहा तो भारत के लिए अपने पूर्वोत्तर हिस्से को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
चीनी संकट फैलेगा तो 3488 किलोमीटर के सीमावर्ती इलाके को गिरफ्त में ठीक उसी तरह लेगा जैसा कश्मीर समेत पाकिस्तान से लगी 3323 किलोमीटर लंबी सीमा पर संकट हमेशा मंडराता है।  चीन ने 62 के युद्ध में आक्साई चिन के 32 हजार वर्ग किलोमीटर की जमीन पर कब्जा किया और पाकिस्तान के साथ 63 के पैक्ट में चीन के कब्जे वाले आॅक्साई चिन से सटी करीब 5 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को दे दी।
यानी कश्मीर के करीब 20 फीसदी जमीन पर चीन का कब्जा है और अब कुछ इसी अंदाज में चीन भूटान में दखल देकर विवादास्पद डोकलाम की जमीन पर कब्जा करना चाहता है जिसके बाद उसकी नजर सिक्किम पर पड़ेगी ही क्योंकि सिक्किम नीति पर उसका विदेश मंत्रालय बदलाव के संकेत दे रहा है।  चीन के सरकारी मीडिया ने छापा है कि "हमें सिक्किम की आजादी का समर्थन करना चाहिए।  हमें इस मसले पर अपना स्टैंड बदलना चाहिए।  हालांकि, 2003 में चीन ने सिक्किम पर भारत के कब्जे को मान लिया था, लेकिन वो अपने स्टैंड को फिर से बदल सकता है।
डोकलाम में चीन की मौजूदगी भारत के लिए आॅक्साई चिन से ज्यादा खतरनाक हो सकती है क्योंकि आॅक्साई चिन का इलाका भारत के किसी दूसरे हिस्से के बीच में नहीं आता है लेकिन भूटान का डोकलाम का इलाका समूचे नॉर्थ ईस्ट के बीच आता है यानी भूटान डोकलाम भारत के लिए सामरिक तौर पर इतना महत्वपूर्ण है कि अगर चीन वहां तक सड़क बनाकर अपने टैंकों को खड़ा कर देता है तो फिर चीन ना सिर्फ समूचे नॉर्थ ईस्ट पर वही से नजर रखेगा बल्कि चीन पाकिस्तान की तरह कभी भी नेपाल या भूटान की सामरिक नीति और इकॉनमी को खुद पर निर्भर कर सिक्किम को ही अपनी निगरानी में ले सकता है।
और बारिकी से अगर डोकलाम के जरिये एक तरफ नेपाल और दूसरी तरफ भूटान के बीच सिक्किम के इलाके को देखें तो ये इलाका नार्थ इस्ट के लिये लाइफ लाइन है क्योंकि पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग के बागडोगरा हवाई अड्डे पर उतरने के बाद सड़क के रास्ते ही नार्थ ईस्ट के सेवन सिस्टर से संपर्क होता है और अगर डोकालाम के बाद जरा भी तिरछी नजर सिक्किम पर चीन डालेगा तो झटके में भारत असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा से कट जाएगा यानी बांग्लादेश के जरिये ही फिर इन राज्यों तक पहुंचा जा सकता है या फिर पश्चिम बंगाल से समुद्री रास्ते से त्रिपुरा पहुंचा जा सकता है। 

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