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सीमा विवाद का सम्मानजनक हल निकालने का यही मौका

अंशुमान त्रिपाठी
नई दिल्ली। चीन एक तरफ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और जंग की धमकी देकर मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहा है। दूसरी तरफ सिक्कम की आजादी की लड़ाई को हवा देने की बात कर रहा है। यह दोनों दो विपरीत बाते हैं। चीन अच्छी तरह जानता है कि अगर वह भारत के खिलाफ युद्ध का विकल्प चुनता है तो आर्थिक मोर्चे पर वह पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। उसके उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार भारत है। यहां वह करीब सात अरब डालर का निर्यात करता है जबकि उसके मुकाबले भारत का निर्यात मात्र 16 मिलियन डालर है। चीनी कंपनियों का छह बिलियन डालर भारत में लगा हुआ है। अगर भारत ने उसके सामानों के आयात पर रोक लगा दी या भारतीयों ने उसके सामानों का बहिष्कार कर दिया तो उसे लेने के देने पड़ जाएंगे। उसके लिए वैकल्पिक बाजार ढूंढना मुश्किल है। इसकी एक झलक पिछले वर्ष दीपावली में चीनी पटाखों के बहिष्कार से मिल चुकी है। सिर्फ एक मौके पर बहिष्कार से चीनी कंपनियों को अरबों का नुकसान हुआ था। अब अगर व्यापारिक संबंधों पर विराम लगा तो चीन को प्रतिवर्ष खरबों का नुकसान होगा। वह इसे झेल नहीं पाएगा। उसकी विश्व महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा पूरी तरह धूल में मिल जाएगी। दूसरी बात यह कि उसे पता है कि युद्ध की स्थिति में अमेरिका और इजरायल सहित विश्व के अधिकांश देश खुलकर भारत के साथ आ जाएंगे। चीन के पक्ष में सिर्फ पाकिस्तान खुलकर खड़ा हो सकता है। उसकी कोई औकात ही नहीं है। चीन मिसाइल का इस्तेमाल करेगा तो भारत के पास मिसाइल रोधक तकनीक है जो चीन और पाकिस्तान के पास नहीं है। परमाणु हमला करेगा तो भौगोलिक स्थिति के कारण उसके लिए भी आत्मघाती होगा। पहले चीन ने सोचा था कि भारत युद्ध की धमकी से डरकर पीछे हट जाएगा। लेकिन भारत के सीमा पर डटकर खड़ा होने के बाद वह समझ गया कि बंदर घुड़की से काम चलनेवाला नहीं। युद्ध में भारत से निपटना उसके बूते की बात नहीं। इसीलिए अब वह सिक्कम की आजादी की लड़ाई को हवा देने की बात कर रहा है। भारत चीन, भूटान सीमा पर डोक ला नामक उस स्थल पर जहां चीन सड़क बनाने की कोशिश कर रहा था। यह भारत के लिए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है। यह सड़क बन गई तो भारत के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाएगा। यही कारण है कि भारतीय सेना किसी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। चीन की दादागीरी को पहली बार कड़ी चुनौती मिल रही है। इससे वह झल्ला उठा है। लेकिन वह तिना शातिर है कि कोई ऐसा कदम उठाने से परहेज कर रहा है जिसके कारण उसे लेने के देने पड़ जाएं। यही मौका है कि भारत उसकी आंख से आंख मिलाकर निर्णायक बात करे और सीमा विवाद का स्थाई हल निकाले।

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