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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के निलंबित विधायक कपिल मिश्रा द्वारा केजरीवाल सरकार के खिलाफ पेश भ्रष्टाचार के सबूतों को लोकायुक्त ने आधा-अधूरा बताया है।  लोकायुक्त ने इसके साथ ही उन्हें दो हफ्ते के भीतर पूरे दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया है।
16 हजार पन्नों के दस्तावेजों को लेकर शुक्रवार को जब लोकायुक्त कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो कपिल के वकील ने कहा कि वह फिलहाल पारिवारिक कारणों से कोर्ट नही आ पाये हैं।  कोर्ट इस बात से भी नाखुश था कि 16 हजार पन्नों के जो दस्तावेज कपिल मिश्रा ने कोर्ट को सौपे हैं, वो भी आधे-अधूरे हैं।  न तो उन दस्तावेजों में इंडेक्स बना हुआ है और न ही कोई पेजिंग की गई है।  यहां तक कि कपिल मिश्रा ने इन दस्तावेजों पर कोई हलफनामा भी नहीं लगाया है।  कोर्ट ने कपिल को 2 हफ्ते का वक्त दिया है, जिसमें उन्हें सही तरीके से दस्तावेजों को फाइल करने के लिए कहा गया है।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कपिल मिश्रा ने गुरुवार को लोकायुक्त कोर्ट पहुंचकर केजरीवाल और सत्येंद्र जैन के खिलाफ मीडिया में दिए गए बयानों को साबित करने के मकसद से 16 हजार पन्नों के दस्तावेज लोकायुक्त कोर्ट को सौंपे थे।  कुल 16 हजार पन्नों के दस्तावेज में करीब 7 अलग-अलग भ्रष्टाचार से जुड़े मामले शामिल हैं।  इस मामले में लोकायुक्त कोर्ट 7 जुलाई को सुनवाई करेगी।
एक वकील ने 9 मई को लोकायुक्त को शिकायत की थी कि कपिल मिश्रा ने भ्रष्टाचार से जुड़े जिन मामलों में मीडिया में केजरीवाल और सत्येंद्र जैन पर आरोप लगाए हैं, उनकी जांच लोकायुक्त करवाए।  शिकायत पर इससे पहले लोकायुक्त कपिल मिश्रा के बयान को इस मामले में एक गवाह के तौर पर दर्ज भी कर चुके हैं।   लोकायुक्त के यहां अरविंद केजरीवाल और सत्येंद्र जैन को लेकर कपिल मिश्रा ने वही सब कहा है, जो उन्होंने मीडिया में लगाए गए आरोप थे। 

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