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सत्यनारायण मिश्र

गुवाहाटी।   मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र आदि में कर्ज अदा नहीं कर पाने के कारण किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएं अक्सर घटती रहती हैं। अपने असम में भी किसानों की हालत काफी दयनीय है। ऐसे एक किसान ने बाढ़ में अपना सब कुछ गंवाने के बाद बीती रात स्थानीय स्तर पर बनाए गए राहत शिविर में आत्महत्या कर ली। राज्य सरकार अभी इस मामले पर मौन साधे है।
मोरीगांव जिले के बरडुबाटोप गांव का किसान कुशल नाथ राज्य के उन हजारों दैवी आपदा के शिकार किसानों में से एक था, जिसने पिछले डेढ़ माह तक विनाशलीला करने वाली बाढ़ में अपना सब कुछ गंवा दिया था। दुर्भाग्य का मारा यह कृषक बूढ़ागांव राहत शिविर में दिन गुजारने को मजबूर था।
राहत शिविर स्थानीय लोगों के प्रयास से बनाया गया था। ग्रामीणों के अनुसार उस क्षेत्र में सरकारी स्तर पर राहत शिविर बनाने की कोई पहल नहीं की गई थी। बड़े पैमाने पर लोगों ने शिकायतें की हैं कि बाढ़ प्रभावित अधिकांश इलाकों में सरकारी तौर पर राहत शिविरों की स्थापना जैसी मदद मुहैया कराने में काफी कोताही की गई है। हालांकि सरकार ने पर्याप्त पैमाने पर  राहत कार्य के दावे लगातार किए हैं।
दुर्भाग्य के मारे कुशल नाथ ने पहली बार बाढ़ में अपना सब कुछ नहीं गंवाया था। स्थानीय तौर पर मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2002 की विनाशकारी बाढ़ में भी उसका सर्वस्व तबाह हो गया था। किसी न किसी तरह उसने फिर से अपने और अपने परिवार को जिंदा रखने लायक जज्बा दिखाते हुए फिर से खड़ा कर लिया था। लेकिन इस बार की भयावह बाढ़ ने उसका सबुकछ फिर मटियामेट कर उसे घोर निराशा में डाल दिया।
स्थानीय जानकारियों के अनुसार उसे पुन: अपने पैरों पर खड़ा होने लायक वित्तीय मदद की कोई उम्मीद कहीं से नहीं दिखाई दे रही थी। जिस परिस्थिति में कुशल नाथ को राहत शिविर में अपनी जान देनी पड़ी, उसकी सारी सच्चाई तो गहन जांच के बाद ही पता चलेगी। लेकिन बाढ़ पीड़ितों तक सरकारी राहत पहुंचाने के दावों की पोल इससे अवश्य खुल जाती है।
मोरीगांव के पुलिस अधीक्षक स्वप्ननील डेका के अनुसार उक्त किसान ऊंचाई के स्थान पर बनाए गए एक अस्थायी पनाहगाह में बाढ़ से बचने के लिए रखा गया था। वह कोई सरकारी राहत शिविर नहीं था। भुक्तभोगी कुछ दिनों से काफी बेचैन तो था ही, साथ ही वह शारीरिक रूप से बाधाग्रस्त भी था। उसे शराब पीने का आदी बताने की कोशिश भी की जा रही है। बताया गया है कि इन्हीं हालात में उसने बीती रात उक्त शिविर में ही खुद को फांसी लगा ली। पुलिस अधीक्षक ने जांच के बाद सारी बात सामने आने की बात कही है।

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