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न्ई दिल्ली। केन्द्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के पास नोटबंदी के अंतिम आंकड़े नहीं हैं। किसी को पता नहीं कि बैंकों ने अभी तक कुल कितनी पुरानी करेंसी जमा की है। रिजर्व बैंक को वार्षिक हिसाब-किताब की क्लोजिंग 30 जून को करनी होती है। इसके बाद जुलाई के मध्य तक वह अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर सालभर का पूरा हिसाब-किताब देश के सामने रखता है। लेकिन इस बार उर्जित पटेल के संसदीय समिति के सामने दिए बयान के बाद स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक की जुलाई में जारी होने वाली अपनी वार्षिक रिपोर्ट मुकम्मल नहीं होगी। इस रिपोर्ट में नोटबंदी के पूरे आंकड़े मौजूद नहीं रहेंगे। उल्लेख्य है कि आठ नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद पूरे देश में बैंकों के बाहर लंबी कतार लगी। आम आदमी अपने पास मौजूद 1000 और 500 रुपये की पुरानी करेंसी को जमा कराने के लिए बैंक पहुंचा। देशभर में बैंकों ने या तो पुरानी करेंसी के बदले नई करेंसी जारी की, अन्यथा पुरानी करेंसी को खाताधारक के अकाउंट में जमा कर दिया। यह प्रक्रिया पूरे देश में एक से लेकर तीन महीने तक अलग-अलग शर्तों के साथ की गई। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पुरानी 1000 और 500 रुपये की करेंसी प्रतिबंधित करने के बाद 15.4 लाख करोड़ रुपये की करेंसी का संचार कर लिया गया है। वहीं नोटबंदी से पहले तक देश में कुल 17.7 लाख करोड़ की करेंसी संचार में थी। इस हफ्ते नोटबंदी पर बनी संसदीय समिति के सामने दूसरी बार पेश होकर रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल ने बताया कि पुरानी करेंसी की गिनती का काम अभी तक चल रहा है। इसके चलते अभी तक रिजर्व बैंक के पास जमा की जा चुकी करेंसी का आंकड़ा नहीं है। वहीं पटेल ने दावा किया है कि उन्हें सितंबर तक पुरानी करेंसी को गिनने का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद ही उचित आंकड़े जारी किए जा सकेंगे।

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