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 राज्य सरकार उठाएगी सारा खर्च
40 हजार 300 करोड़ रुपए होगा खर्चा

एनओपी ब्यूरो
गाजियाबाद। दिल्ली से मेरठ के लिये हाईस्पीड ट्रेन को लेकर जीडीए की टेंशन दूर हो गई है। राज्य सरकार ने इस ट्रेन को लाने के लिये होने वाला खर्च न केवल वहन करने का निर्णय लिया है, बल्कि अग्रिम तौर पर सौ करोड़ रुपए रिलीज भी कर दिये हैं। हाईस्पीड ट्रेन के लिये ट्रैक बिछाने से लेकर ट्रेन दौड़ाने तक 40 हजार 300 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च है।
दरअसल, हाईस्पीड ट्रेन लाने का जिक्र बसपा शासनकाल मे हुआ था, जबकि इसका निर्णय सपा की सरकार में किया गया था। लेकिन अखिलेश सरकार ने अपने खजाने से पैसा देने से मना कर दिया था। उस दौरान जीडीए के उपाध्यक्ष और अध्यक्ष पद पर संतोष कुमार यादव थे, लिहाजा जीडीए ने इस ट्रेन पर होने वाले खर्च को जीडीए के खजाने से निकालने का दम भरा था। चूंकि ट्रेन के लिये सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं, लिहाजा जीडीए के मौजूदा प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें गाढ़ी हो रही थीं। फिलवक्त जीडीए कर्ज में डूबा है और अपनी एक-आध परियोजनाओं को पूरा करने के लिये और ज्यादा कर्ज लेने जा रहा है। ऐसे में हाईस्पीड ट्रेन अधिकारियों के लिये सिरदर्द पैदा कर रही थी।
अब योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस ट्रेन को लाने का सारा खर्च खुद वहन करने का निर्णय लिया है। जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने इसकी पुष्टि भी की है। हाईस्पीड ट्रेन आने की खबर पुख्ता होने और राज्य सरकार से इसकी लागत वहन करने की खबर ने रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों को राहत दी है। खासकर राजनगर एक्सटेंशन के बिल्डरों में स्वाभाविक खुशी की लहर है। लाजिमी भी है कि दिल्ली से मेरठ के बीच जिन इलाकों से हाईस्पीड ट्रेन भविष्य में गुजरेगी, वहां की मार्केट का ग्राफ भी उठेगा।

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