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ड्रैगन को दी खुली चुनौती , दो बमवर्षक विमानों ने भरी उड़ान 

चीन के दावे को खारिज किया

दक्षिणी चीन सागर के रास्ते हर साल होता हैअरबों डॉलर का व्यापार 

टोक्यो। ड्रैगन को खुली चुनौती देते हुए अमेरिकी वायुसेना के दो बमवर्षक विमानों ने विवादित दक्षिणी चीन सागर के ऊपर से उड़ान भरी।  अमेरिकी वायुसेना ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।  अमेरिका ने इस क्षेत्र पर चीन के दावे को खारिज करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र मानने पर जोर दिया।
गुरुवार को गुआम से अमेरिकी वायुसेना के विमान ने दक्षिणी चीन सागर के ऊपर उड़ान भरी।  बता दें कि जर्मनी में होने वाले जी-20 सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाकात होने की संभावना है।  उम्मीद है कि इस मुलाकात के दौरान दोनों देश उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण को लेकर चीन की भूमिका पर चर्चा करेंगे।
अमेरिका का मानना है कि बीते मंगलवार को उत्तर कोरिया ने जिस अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिकमिसाइल का परीक्षण किया है उसकी जद में अमेरिका है।  इतना ही नहीं, अलास्का और हवाई क्षेत्र भी इसकी रेंज में है। अमेरिकी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया पर नकेल कसने के लिए चीन से मदद मांग रहे हैं।  चीन के नाराज होने का जोखिम लेते हुए अमेरिकी सेना ने दक्षिण चीन सागर को अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र मानने पर जोर दिया है।  दक्षिण चीन सागर पर चीन के पड़ोसी देश ब्रूनेई, मलयेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम भी अपना दावा करते रहे हैं।   दक्षिणी चीन सागर के रास्ते हर साल अरबों डॉलर का व्यापार होता है।  माना जाता है कि इसी कारण चीन इस इलाके में अपना दबदबा चाहता है।
अमेरिका, दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन की सैन्य सुविधाओं के विस्तार की हमेशा से आलोचना करता रहा है।  अमेरिका का मानना है कि चीन इसका इस्तेमाल अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए कर सकता है।  इस इलाके के हवाई क्षेत्र में उड़ने वाले ये दोनों अमेरिकी विमान जापानी जेट फाइटर के साथ पास के ही पूर्वी चीन सागर में प्रशिक्षित किए गए थे।  यह पहला मौका था जब दोनों देशों ने एक साथ मिलकर कोई नाइट ड्रिल किया।  
उत्तर कोरिया ने दावा किया है कि इसने लंबी दूरी का मिसाइल विकसित किया है जो अमेरिका को डरा सकता है जिसके बाद क्षेत्र में भारी तनाव है और इस सब के बीच यह अमेरिकी सैन्य गतिविधि देखी गई। अमेरिका चाहता है कि प्योंगयांग पर चीन की ओर से अधिक दबाव बनाया जाए जिससे यह अपना मिसाइलों और परमाणु बमों पर रिसर्च रोक दे।

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