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पटना। बिहार में महागठबंधन के बीच अभी सबकुछ ठीक नहीं हुआ है। बुधवार को नीतीश कुमार की कैबिनेट बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सफाई देते हुए कहा था कि वह अपना इस्तीफा नहीं देंगे। वहीं अब जदयूू की ओर से तेजस्वी की सफाई को नाकाफी बताया गया है। जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि हमारी पार्टी तेजस्वी यादव की दलीलों से संतुष्ट नहीं है। नीरज कुमार ने कहा कि जदयू हमेशा से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ रही है। हम उम्मीद करते हैं कि राजद की ओर से कोई गंभीर जवाब दिया जाएगा, अगर ऐसा नहीं होता है तो पार्टी इस पर विचार करेगी।
बुधवार को नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक बुलाई थी, जिसके बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया से बात करते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई दी थी। सभी आरोपों को झूठा करार देते हुए तेजस्वी यादव ने इसे पीएम मोदी और अमित शाह की साजिश करार दिया। तेजस्वी ने कहा कि 28 साल के एक युवा से डर गई है बीजेपी इसलिए फंसाने की साजिश हो रही है। तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की और बीजेपी को करारा जवाब देंगे।
सीबीआई के 27 अधिकारियों की टीम ने पिछले हफ्ते लालू यादव के 12 ठिकानों पर छापेमारी की और राबड़ी देवी तथा उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव से घंटों पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार तेजस्वी से पटना मॉल में हिस्सेदारी से संबंधित सवाल पूछे गए। सीबीआई के अडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने बताया कि लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे को दो होटलों के रखरखाव के लिए एक प्राइवेट कंपनी को टेंडर दिया गया और इसके एवज में लालू को तीन एकड़ जमीन दी गई। ये टेंडर साल 2004 से 2009 के बीच इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिजम कॉपोर्रेशन के जरिए दिए गए थे, जब लालू रेल मंत्री थे। अस्थाना ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच रची गई इस कथित साजिश के लिए लालू और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन आॅफ करप्शन ऐक्ट, 1988 के तहत केस दर्ज किया गया है। तेजस्वी यादव ने अपने ऊपर लगे सारे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 2004 में मैं 13-14 साल का था। इस उम्र में घोटाला कैसे कर सकता हूं। तब मेरी मूंछे तक नहीं उगी थी।
लालू परिवार पर पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों के फ्री गिफ्ट की बरसात भी जांच के दायरे में है। इसमें भी तेजस्वी के नाम पर कई संपत्तियों की लेन-देन हुई है। इनकी जांच चल रही है। बीजेपी नेता सुशील मोदी ने पिछले दो महीने में लालू परिवार पर कई आरोप लगाए हैं। सुशील मोदी के अनुसार- उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एवं स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप की स्वयं एवं उनके परिवार की एक हजार करोड़ से ज्यादा की बेनामी सम्पत्तियां हैं। पटना में जहां लालू परिवार का मॉल बन रहा है वो जमीन पार्टी नेता प्रेमचंद गुप्ता ने लालू के बेटों के नाम की है। प्रेम गुप्ता की कंपनी इस मॉल की जमीन की मालिक थी और बाद में उसने इसे लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटों तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के नाम कर दिया। इसके अलावा तेजस्वी और तेजप्रताप को चाचा और नाना से भी करोड़ों के उपहार मिले। जो जांच के दायरे में हैं। लालू की बेटी हेमा यादव और पत्नी राबड़ी देवी को उनके नौकर ललन चौधरी ने 2014 में करीब एक करोड़ रुपये की जमीन दान में दी थी। ललन के नाम से बीपीएल कार्ड भी बना हुआ है। ये भी जांच के दायरे में है।
लालू की बेटी मीसा भारती और दामाद शैलेश भी ईडी की जांच के घेरे में हैं। ईडी की टीमों ने मीसा-शैलेश के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। 8000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में ये पूछताछ हुई थी। ये मामला फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये ब्लैक से व्हाइट कराने का है। मंगलवार को दिल्ली में ईडी ने मीसा भारती से 8 घंटे तक पूछताछ की और बुधवार को शैलेश को समन किया गया है। लालू परिवार इन सब जांचों के लिए मोदी सरकार पर सियासी बदले का आरोप लगा रहा है।

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