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मंत्रियों-विधायकों की चुप्पी खड़े कर रही है सवाल
कस्टडी में हत्या के बाद लावारिस बताकर फूंक दी लाश
 आखिर किसका हाथ है इंस्पैक्टर सुधीर त्यागी की पीठ पर

अजय औदीच्य
गाजियाबाद। पुलिस वालों की क्रूरता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी देख यह कहना बेमानी नहीं होगा कि शहर के हालात बहुत चिंताजनक हैं और कुछ पुलिस वाले अखिलेश यादव के कार्यकाल से भी ज्यादा बेलगाम हैं। बेलगाम ही क्यों, क्रूर भी हैं। योगी राज में हालात जर्जर की नहीं बर्बर हो गए हैं और यही हाल रहा तो यकीनन तौर पर जो हश्र बसपा और सपा का हुआ है, उससे बुरा भाजपा का हो सकता है। बात कड़वी जरूर है, लेकिन है सोलह आने सच। साहिबाबाद में चोर बताकर भीड़ के बीच पकड़े गए युवक को हिरासत में पुलिस ने पीट-पीटकर मार डालने के बाद जिस तरह लावारिस बताकर फूंक डाला, योगी के निजाम में कोई भी संवेदनशील व्यक्ति भरोसा नहीं कर सकता।
हैरत की बात यह है कि केन्द्र और प्रदेश में भाजपा के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हैं, जबकि गाजियाबाद में सांसद, मंत्री, मेयर और पांचों विधायक भी भाजपा के। बावजूद इसके एक पुलिस वाले की बर्बरता पर कोई चुप्पी नहीं तोड़ रहा। सत्ता संभालने के बाद कानून का राज कायम करने का दम भरने वाले योगी और भाजपा के तमाम नेता इस बर्बरता पर क्यों नहीं बोल रहे, यह सवाल हर किसी की जुबान पर है। क्या एक पुलिस इंस्पैक्टर इतना असरदार है कि मंत्रियों, मेयर और विधायकों की भी बोलती बंद कर सकता है? अगर हां तो यकीनन यह कहना बेमानी नहीं होगा कि योगी राज में कानून-व्यवस्था जर्जर नहीं, बल्कि बर्बर हो चुकी है और ऐसा निजाम ना होता तो ही अच्छा होता।
सबको पता है कि 9 जुलाई को साहिबाबाद के श्यामपार्क एक्सटेंशन में मनदीप नेगी नाम के युवक को चोर बताकर चार युवकों आदित्य, अर्जुन, रिन्कू और अजीत ने पकड़कर थाना पुलिस को सौंप दिया। वह चोर था या नहीं, यह तो वही जाने, लेकिन यह जरूर है कि पुलिस थाने में उसकी तब तक बर्बर पिटाई की गई, जब तक वह मौत के घाट नहीं उतर गया। जब सारी रात मनदीप अपने घर नहीं पहुंचा तो 10 जुलाई को उसके माता-पिता पुलिस थाने पहुंचे और गुमशुदगी की तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा। पुलिस ने उन्हें यह नहीं बताया कि मनदीप थाने की हवालात में ही है। बकौल माता-पिता, इंस्पैक्टर सुधीर त्यागी ने उन्हें यह कहकर चलता कर दिया कि कल आना। मनदीप के माता-पिता 11 और 12 जुलाई को भी थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। 15 जुलाई को पुलिस ने मनदीप की लाश को लावारिस बताकर फूंक दिया।
उड़ती-उड़ती खबर जब मनदीप के मां-बाप के पास पहंुची तो वे 16 जुलाई को फिर थाने पहुंचे। वहां उन्हें कुछ कपड़े-चप्पल दिखाए गए, जिन्हें उन्होंने पहचान लिया और बेहोश होकर वहीं गिर गए। जवान बेटे का पुलिस हिरासत में कत्ल और जान-बूझकर उसकी लाश को लावारिस जला देने की बर्बरता जिसने भी देखी-सुनी, कानून-व्यवस्था पर हैरत जताता दिखा। पुलिस बर्बरता की हद देखिये कि साहिबाबाद पुलिस ने अपना पाप छिपाने के लिये उन चार लड़कों को ही मुजरिम बना दिया, जिन्होंने मतदीप नेगी को पकड़कर पुलिस के हाथों सौंप दिया था। अब खबर है कि इनमें से एक रिन्कू को पकड़कर पुलिस ने बिठा रखा है, जबकि बाकी तीन फरार बताए जा रहे हैं। यहां एक और बात बताना जरूरी होगा कि सुधीर त्यागी पहले कविनगर पुलिस थाने के भी प्रभारी रह चुके हैं और इस थाने की हिरासत में भी एक युवक की हत्या के मामले में उनका नाम सुर्खियों में रह चुका है।
बहरहाल, एक बात तो साफ है कि साहिबाबाद पुलिस ने बड़ा गुनाह किया है और इस गुनाह पर जनप्रनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे गुनाहगारों को दण्डित कराकर भाजपा सरकार और मोदी-योगी के निजाम की बदनामी रोकें। विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह हों या यूपी के खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग, मेयर अशु वर्मा, विधायक सुनील शर्मा, नंदकिशोर गुर्जर, मंजू सिवाच और अजीतपाल त्यागी, इंस्पैक्टर सुधीर त्यागी ने सबको कटघरे में खड़ा कर दिया है। साबित हो रहा है कि इन तमाम जनप्रतिनिधियों से सुधीर त्यागी भारी पड़ रहे हैं। आखिर किसके आशीर्वाद से, यह तो वही जानें, लेकिन भाजपा के जनप्रनिधियों की भरमार के बावजूद कानून के साथ ऐसी बर्बरता कम से कम गाजियाबाद में तो पहले कभी नहीं देखी गई थी। कह सकते हैं कि योगी राज में अखिलेश राज से भी बुरा हाल है।

सुधीर पर हत्या का मुकदमा होः सत्यपाल

बसपा नेता सत्यपाल चैधरी के साथ मनदीप नेगी के माता-पिता और रिश्तेदार व पड़ोसी मंगलवार को एसएसपी एचएन सिंह से मिले और मांग की कि साहिबाबाद थाने के इंस्पैक्टर सुधीर त्यागी व अन्य दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। सत्यपाल ने कहा कि कानून सबके लिये बराबर है। मनदीप नेगी की हत्या पुलिस कस्टडी में हुई है और उसकी लाश को लावारिस में फूंककर पुलिस ने और बड़ा गुनाह किया है। सत्यपाल ने जनरल वीके सिंह, मेयर अशु वर्मा, राज्यमंत्री अतुल गर्ग, और सभी विधायको से सवाल किया है कि क्या उन्हें पुलिस को बर्बर बनाने के लिये ही जनता ने चुना था। सत्यपाल ने कहा है कि मनदीप नेगी अगर चोर था तो इसके निर्णय का अधिकार अदालत से कराना चाहिए था। पुलिस किसी की हत्या नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि इस मामले को सड़क से लेकर कोर्ट तक उठाया जाएगा। फिलहाल पुलिस की बर्बरता योगी आदित्यनाथ की सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा कर रही है।

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