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देवेंद्र गौतम
जम्मू-कश्मीर के इलाके में लश्कर तैयबा के आतंकी संदीप की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो गया है कि अब आतंकी संगठन वारदातों के लिए गैर मुस्लिम अपराधी तत्वों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी बात यह कि आतंकियों की निचली कतारों पर शीर्ष नेताओं का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। अमरनाथ यात्रियों की बस पर हमला कर सात लोगों को मौत के घाट उतारने में लश्कर के स्थानीय कमांडर का हाथ सामने आया है। जबकि लश्करे तैयबा के नेतृत्व ने घटना को गैरवाजिब और निंदनीय बताया है। जाहिर है कि इसे लश्कर के ऊपरी नेताओं के निर्देश पर नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर अंजाम दिया गया है। निचली कतारों के आतंकी अपराधी तत्वों के साथ मिलकर अपने स्तर पर लूटपाट और दहशत फैलाने में लगे हैं। हमले से कुछ ही दिन पूर्व घाटी से गिरफ्तार आतंकी संदीप कुमार शर्मा इस नए गठबंधन की मिसाल है। वह मुजफ्फरनगर का रहनेवाला आपराधिक पृष्ठभमि का व्यक्ति है। वह वेल्डर का काम करने पंजाब गया था। इसी क्रम में लश्करे तैयबा के लोगों से उसकी मुलाकात हुई। वह लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देने में वह माहिर है। लश्करे तैयबा ने उसे बैंक और एटीएम लूट और इसी तरह की वारदातों के लिए अपने साथ जोड़ा था। लूट की रकम का वे आपस में बंटवारा कर लेते थे। संदीप को न तो भारत से कुछ कुछ लेना देना है न पाकिस्तान से। न हिंदुत्व से न इस्लाम से। उसका भगवान, उसका खुदा पैसा है। इसके लिए वह किसी से हाथ मिला सकता है। पिछले साल कानपुर के पास रेल दुर्घटनाओं में आतंकियों का हाथ होने की बात सामने आई थी। उस समय एक अपराधी की गिरफ्तारी के बाद इस बात का खुलासा हुा था कि रेल पटरियों पर बम प्लांट करने के लिए भी गैर मुस्लिम अपराधियों का इस्तेमाल किया गया था। नोटबंदी के तुरंत बाद इस काम के लिए नई करेसी में तीन लाख रुपये दिए गए थे। लिहाजा पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार रहने वाले अपराधियों के बीच कहीं न कहीं आतंकी संगठनों की सक्रियता बढ़ रही है। यह खतरनाक है। अब आतंकवाद का मतलब सिर्फ धार्मिक उन्माद में किया गया गैरमानवीय या आपराधिक कृत्य नहीं है। लिहाजा खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों को कुछ और सतर्कता बरतने की जरूरत है। उसे देश के अंदर सक्रिय उन शातिर अपराधियों पर भी नज़र रखनी होगी जिनका कोई धर्म या ईमान नहीं है। संदीप के परिजन उसके आतंकी कनेक्शन को लेकर हैरान हैं। जुर्म साबित होने पर उसके लिए फांसी की सजा तक उन्हें मंजूर है। लेकिन इस सिलसिले पर लगाम लगाना आसान नहीं है।

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