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हार्वर्ड मेडिकल के शोधकर्ताओं का करिश्मा

वाशिंगटन। आमतौर पर मूवी सेव करने के लिए हम पेन ड्राइव या हार्ड डिस्क का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हार्वर्ड  मेडिकल स्कूल के शोधकतार्ओं ने इसे जिंदा कोशिकाओं के डीएनए में सेव कर विज्ञान का नया करिश्मा कर दिखाया है। वैज्ञानिकों ने न सिर्फ फिल्म को डीएनए में सुरक्षित किया बल्कि इसे दोबारा देखने के लिए रिट्रीव भी कर दिया। आने वाले वक्त में आप अपने डीएनए में आॅफिस की फाइल्स को सेव करके रखें तो बड़ी बात नहीं।। सैकड़ों साल बाद अब ये पहली मूवी बन जाएगी जिसे जिंदा कोशिका के डीएनए में कोडिंग कर सेव किया गया। इसे वापस देखने के लिए डीकोड कर रिट्रीव भी किया गया। सुप्रसिद्ध जर्नल नेचर ने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ता की एक रिसर्च रिपोर्ट को पब्लिश करते हुए ये जानकारी दी। इस शोध ने ये साबित कर दिया है कि हमारा शरीर दुनिया की सबसे अधिक स्टोरेज डिवाइस है। वैज्ञानिकों ने इससे पहले भी शेक्सपियर की रचनाओं को डीएनए में संरक्षित किया था। इस तरह के शोध से चिकित्सा वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता भी मिल सकती है। इसके तहत वैज्ञानिक शरीर की कोशिकाओं की गतिविधि का भी वीडियो तैयार कर लें। और जब कभी कोई व्यक्ति बीमार पड़े तो डॉक्टर उसकी कोशिकाओं की गतिविधियों का वीडियो देखकर समझ लेंगे कि आखिर उसे हुआ क्या था। जैसे एयरोप्लेन के ब्लैक बॉक्स में सभी जानकारियां सुरक्षित हो जाती हैं।

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