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नई दिल्ली। जर्मनी में चल रही जी-20 बैठक के दौरान पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई है। चीन से रिश्ते में तल्खी के बीच ये मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है।  सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच विवादित मुद्दे को लेकर भी बातचीत हुई है।  जानकारों की माने तो यह एक अच्छा कूटनीतिक कदम है।  डोक ला क्षेत्र में भारत और चीन के बीच तल्खी के बीच ये मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है।  डोक ला में भारत और चीन के बीच तनाव इस स्तर पर है कि दोनों ही देशों ने अपनी सेनाओं को स्टैंड आॅफ पर रखा है। कल तीन के विदेश मंत्रालय की ओर से यह बयान तक दिया गया था कि दोनों ही शीर्ष नेताओं के बीच कोई मुलाकात नहीं होनी है।  इसी के चलते सभी नजरें इस बात पर थीं कि दोनों नेताओं के बीच शिष्टाचार की मुलाकात होती है या नहीं।  जी-20 सम्मेलन के दौरान आज ब्रिक्स  देशों के नेताओं के साथ हुई बैठक में पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने एक दूसरे की जमकर तारीफ की।  मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ जी-20 देशों को साथ मिलकर लड़ने को कहा तो जिनपिंग ने आतंकवाद पर भारत के रुख की तारीफ की।  भारत और चीन के बीच इस तनाव की वजह भारत, चीन और भूटान की सीमा को छूता 89 किलोमीटर का डोकलाम इलाका है।  इस पहाड़ी इलाके को चीन डोंगलांग, भूटान डोकला और भारत डोक ला कहता है और तीनों ही देश इस पर अपना हक जताते हैं।  डोक ला सिक्किम के नाथुला दर्रे से 15 किलोमीटर दूर है, भूटान के मिलिट्री बेस से 10 किलोमीटर दूर और चीन के यादोंग शहर से 10 से 12 किलोमीटर दूर है।  डोकलाम क्षेत्र से सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी काफी नजदीक है इसलिए सुरक्षा दृष्टि से ये इलाका भारत के लिए जरूरी है।  ये इलाका एक घाटी की तरह है जिसमें चीनी सेना के लोग ऊपर से नीचे की तरफ आ-जा सकते हैं इस जगह को टर्निंग प्वाइंट भी कहते हैं।  16 जून को चीन की सेना पीएलए की कंस्ट्रक्शन पार्टी यानी सड़कें बनाने वाला दस्ता इसी इलाके में अचानक घुस आया था और सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया था।  चीन विकास के नाम पर सड़क बनाने की बात कहता है लेकिन इसके पीछे मकसद है भारतीय सीमा तक चीनी टैंकों और गोला-बारूद को पहुंचाना और युद्ध के हालातों में अपने ठिकाने मजबूत करना है।  20 जून की बात है जब भूटान की सेना ने चीनी सेना को रोकने की कोशिश की।  जब चीन के सैनिक नहीं माने तो भारत को दखल देना पड़ा।  इसके बाद भारत और चीन की सेना आमने-सामने हो गई। ।  दरअसल भारत और भूटान के बीच सुरक्षा समझौता है जिसके तहत भारतीय फौजें भूटान की सीमा के भीतर तैनात हैं। ।  लेकिन चीन अपनी गलती छिपाने के लिए आरोप लगा रहा है कि भारत ने सीम पार की है।


जी-20 की बैठक में मोदी ने पेश किया आतंकवाद विरोधी जंग का 10 सूत्री एजेंडा

1.आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई अनिवार्य। ऐसे देशों के जी-20 देशों में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध।
2.संदिग्ध आतंकवादियों की राष्ट्रीय सूची का जी-20 देशों के बीच वितरण। नामांकित आतंकवादियों के खिलाफ साझा कार्रवाई अनिवार्य।
3.आतंकवादियों से संबंधित प्रभावकारी सहयोग के लिए कानूनी प्रक्रिया, जैसे प्रत्यर्पण को आसान तथा शीघ्र प्रभावी बनाना।
4.अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन का आयोजन।
5.संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद प्रस्तावों तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रियाओं का प्रभावी क्रियान्वयन।
6. कट्टरता विरोधी कार्यक्रमों पर जी-20 द्वारा साझे प्रयास तथा अभ्यास का आदान-प्रदान।
7.एफएटीएफ तथा अन्य प्रक्रियाओं द्वारा आतंकवाद के वित्त पोषण के स्रोतों तथा माध्यमों की प्रभावशाली बंदी।
8.एफएटीएफ की तरह एक दस्ता तथा बारूद निरोधक कार्यदस्ता का गठन ताकि आतंकवादियों तक पहुंचने वाले खतरनाक हथियारों के स्रोतों को बंद किया जा सके।
9. जी-20 देशों के बीच आतंकवादी गतिविधियों पर केंद्रित साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रभावी सहयोग।
10. जी-20 देशों में आतंकवाद विरोधी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच आपसी आपसी सहयोग का प्रभावी  तंत्र विकसित करना।

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