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आम आदमी पार्टी का कलह फिलहाल थम गया दिखता है। कुमार विश्वास मान गये हैं। पार्टी सूत्र कहते हैं कि उनसे कुछ वादे किये गये हैं। और कुछ जिम्मेदारियां भी दी गयी हैं। उन्हें केजरीवाल ने राजस्थान का प्रभारी बना दिया है। इस नयी जिम्मेदारी को सौंपते हुए पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने उन पर एक बार फिर विश्वास दिखाया है। अगर सही तरीके से इस फैसले को देखें तो विश्वास को राजस्यथान की यह चुनौती सौंपकर आम आदमी पार्टी का संकट टला है


यही नहीं, कुमार विश्वास को बीजेपी का एजेंट बताने वाले अमानतुल्लाह के खिलाफ एक्शन का फैसला कुमार विश्वास की शर्तों को पूरा करने के लिए ही किया गया है। पार्टी नेतृत्व और खासकर केजरीवाल पर सवाल खड़ा करने वाले कुमार विश्वास को आम आदमी पार्टी ने ये नयी जिम्मेदारी देकर उनके सामने नयी चुनौती खड़ी कर दी है। इसके साथ ही बीते कुछ दिनों से चला आ रहा ड्रामा कुमार खत्म समझा जा रहा है। तो कुमार मान गये।

 विश्वास के मान जाने के बाद पार्टी के प्रमुख नेता व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि भले ही विश्वास लगातार कह रहे हों कि उन्हें पद और पार्टी का कोई लालच नहीं हैलेकिन पार्टी ने उनकी जिम्मेदारियों को बढ़ाते हुए राजस्थान का प्रभारी बना दिया है। इस बयान में निहित है कि कुमार विश्वास दरअसल पद और जिम्मेवारियां चाह रहे थे। उनकी मांग को बल इसलिए भी मिल गया क्योंकि पार्टी को पंजाब और अभी हाल में दिल्ली एमसीडी के चुनाव में करारी हार मिली।

पर अब कुमार विश्वास को राजस्थान में कुछ करके दिखाना होगा। कुमार के पास ज्यादा वक्त भी नहीं है। क्योंकि राजस्थान में अगले साल ही विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रभारी बनाए से यह भी साफ है कि राजस्थान विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी की ओर से कुमार विश्वास मुख्य चेहरा होंगे। कुमार विश्वास का राजस्थान से खास रिश्ता है और उनकी पत्नी मंजू शर्मा भी राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से हैं। खुद कुमार विश्वास राजस्थान में घूम-घूम अपनी कविताएं गाते रहे हैं और उनकी अपनी फैन फालोइंग है। 

आप कवि हैं, बहुत लोकप्रिय हैं, तो अपनी लोकप्रियता राजस्थान में दिखाइये। पार्टी ने मानो यही कहा है उनसे। और अब कुमार को अपनी साख बरकरार रखने के लिए वाकई कड़ी मेहनत करनी होगी। और कुछ खास कर गुजरना होगा। वरना कुमार के खिलाफ एक बार फिर आवाजें उठेंगी? सन 2014 के आम चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी और स्मृति ईरानी के खिलाफ चुनाव लड़ने के समय कुमार विश्वास ने काफी मेहनत तो की थी, पर नतीजा सिफर रहा था। तब उनके साथ उनकी पत्नी मंजू शर्मा भी चुनाव मैदान में साथ रहीं थी।
अब अगर राजस्थान में कुमार विश्वास पार्टी को आशातीत सफलता दिलाने में कामयाब रहते हैंतो उनका कद बढ़ेगा और फिर केजरीवाल के बराबर खड़ा होने से उन्हें कोई रोक नहीं सकता। 

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