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विद्याशंकर तिवारी
हम सबने बचपन में रुस्तम और सोहराब की ईरानी कहानी पढ़ी थी कि रुस्तम ने धन, पद और यश लोलुपता में अपने ही बेटे सोहराब की धोेखे से हत्या कर दी थी, मरते समय सोहराब ने कहा कि जब मेरे पिता रुस्तम को पता चलेगा कि तूने मुझे धोखे से मारा है तो वह तूझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे। सोहराब को यह नहीं पता था कि मारने वाला और कोई नहीं बल्कि उसका बाप रुस्तम है। ऐसा करते समय रुस्तम को भी नहीं पता था कि वह अपने बेटे सोहराब के कलेजे में खंजर भोंक रहा है। जैसे ही रुस्तम ने सोहराब के बाजू में अपनी दी हुई ताबीज देखी उसके हाथ से तोते उड़ गये। जब रुस्तम को इहलाम हुआ कि उसके हाथों कटार से मारा गया सोहराब उसी का बेटा है तब तक बहुत देर हो चुकी थी, उसके बाद अपने दर्द को बयां करने के लिए उसके पास शब्द नहीं थे। समाजवादी पार्टी के दंगल राउंड-2 में जो कुछ भी होने जा रहा है उसमें अंतर सिर्फ इतना है कि इस सियासी कहानी में रुस्तम को पता है कि सियासी अखाड़े में जिससे मुकाबला होना है वह कोई और नहीं बल्कि उसका बेटा अखिलेश रुपी सोहराब है और सोहराब को भी पता है कि मुलायम रूपी रुस्तम उनके पिता है। इसके बावजूद दोनों मुकाबले के लिए तैयार हैं, यह लगभग तय है कि अब बाप-बेटे अलग चुनाव लड़ेंगे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पार्टी विधायकों की बैठक ली और उनसे हलफनामे भरवाये जिसे चुनाव आयोग में जमा करना है। सभ िसमर्थक विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने उनके प्रति आस्था जताई। दिलचस्प बात यह रही कि इस बैठक में वो आजम खान भी पहुंचे जो समझौता कराने का सूत्रधार बने हुए हैं। चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी की साइकिल पर दावा ठोक रहे दोनों गुटों से अपना बहुमत साबित करने के लिए समर्थन देने वाले विधायकों , पार्षदों के हलफनामे तलब किए हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को 9 जनवरी तक का समय दिया है जिसमें समर्थन दे रहे सभी सांसदों, विधायकों और पार्षदों के साइन किए हलफनामे मांगे हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि दोनों गुटों ने अलग-अलग चुनाव आयोग से मुलाकात कर खुद को असली समाजवादी पार्टी बताया है। ऐसे में बहुमत के जरिए चुनाव आयोग दोनों धड़ों की मजबूती का आकलन करना चाहता है। अंदर की खबर है कि अखिलेश अपनी शर्तों को मनवाये बिना समझौते के लिए तैयार नहीं हैं जबकि अमर सिंह व शिवपाल पार्टी छोड़ने को तैयार हैं। यही नहीं अखिलेश के लिए शिवपाल अपनी सीट जसवंत नगर को भी छोड़ने को तैयार बताये जाते हैं लेकिन मुलायम सिंह अड़े हुए हैं, उनका कहना है कि मुझे अध्यक्ष पद से हटाया नहीं जा सकता, हम अखिलेश से लड़ने को तैयार हैं अलबत्ता आजम खान ने अभी भी आस नहीं छोड़ी है और कहा कि मैं नाउम्मीद नहीं हूं। यह सब क्यों हुआ किसी से छिपा नहीं है, लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते कि दोनों साथ आएं।
इस बीच अखिलेश ने शिवपाल के बर्खास्त किए गए चार जिला अध्यक्षों को पार्टी में वापस ले लिया है। कुछ दिन पहले शिवपाल यादव ने देवरिया के रामइकबाल यादव, कुशीनगर के राम अवध यादव, आजमगढ़ के हवलदार यादव और मिजार्पुर के आशीष यादव को जिला अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था। ये सभी लोग अखिलेश खेमें के माने जाते हैं, अखिलेश यादव ने सपा के सभी जिला इकाइयों को चुनाव की तैयारी करने के आदेश दिए हैं और विधायकों से स्पष्ट कर दिया है कि अब भ्रम और दुविधा में रहने की जरूरत नहीं है। चुनाव की तैयारी किजिए मतलब यह कि अलग होकर चुनाव लड़ना है, वह लोकदल और कांग्रेस के साथ हाथ मिला सकते हैं। ये दोनों दल अन्य सहयोगी दलों के साथ अखिलेश को गले लगाने के लिए कब से तैयार बैठे हैं।

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