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1982 में नेशनल पैंथर्स पार्टी की स्थापना करके राष्ट्रीय एकता आंदोलन की शुरुआत करने वाले प्रो.भीमसिंह ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले आज दोपहर जंतर मंतर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के लोगों को संबोधित करते हुए राजनीतिक दलों और सिविल सोसायटी से जम्मू-कश्मीर समस्या को सुलझाने में मदद करने की अपील की, जो सिर्फ एक झंडा, एक संविधान और कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार से ही हल हो सकती है। 



पैंथर्स सुप्रीमो ने अफसोस के साथ कहा कि भारतीय संसद ने धारा 370, जो कि 1950 में अंतरिम तौर पर शामिल की गयी थी,  नाम पर जम्मू-कश्मीर के भारतीय नागरिकों के लिए प्रजातंत्र के दरवाजे बंद कर दिए।



प्रो.भीमसिंह ने जम्मू-कश्मीर, विशेष तौर पर कश्मीर घाटी में रहने वाले लोगों के साथ, जिनके नेतृत्व में द्विराष्ट्र सिद्धांत को खारिज करते हुए 1947 में तिरंगा झंडा लहराया था, सहानुभूति और प्यार का इजहार किया। उन्होंने कश्मीरी नेतृत्व विशेष तौर पर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला, मिर्जा अफजल बेग, मौलाना मसूदी, सोहरावर्दी और अन्य नेताओं की प्रशंसा की, जिन्होंने राज्य को बांटने के खिलाफ लोगों का नेतृत्व किया और तिरंगे झंडे के साथ खड़े हुए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा और अलग संविधान ही जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ भेदभाव के लिए जिम्मेदार है।



प्रो.भीमसिंह ने भारतीय संसद पर बीमारी का इलाज करने में नाकाम रहने और 1950 में भारतीय संविधान में अंतरिम तौर पर शामिल की गयी, अस्वीकार्य और नापसंदीदा धारा- 370 से उठने वाले शोलों पर ध्यान न देने का आरोप लगाया।

प्रो.भीमसिंह ने पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में बच्चों, महिलाएं बूढों और युवाओं पर पेलट गन के उपयोग पर जिसके कारण सैंकड़ों लोगों ने अपनी आंखें गंवा दी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चुप्पी पर आश्चर्य व्यक्त किया।

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