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विद्याशंकर तिवारी
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी  का कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल  के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है। समाजवादी पार्टी में हाल में शामिल हुए राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने  गठबंधन को लेकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं यूपी चुनावों के प्रभारी गुलाम नबी आजाद और आरएलडी प्रमुख अजित सिंह से लंबी बातचीत की और उसके बाद सपा प्रमुख मुलाायम सिंह यादव प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव से मिले।  सपा ने गठबंधन के लिए कांग्रेस रालोद और जदयू को नया प्रस्ताव दिया है। सपा ने कांग्रेस से गठबंधन के लिए उसे 80 सीटों का आॅफर दिया है, जबकि आरएलडी और जेडीयू के लिए 38 सीटें छोड़ने तो तैयार है। इससे पहले यूपी की सत्ताधारी सपा विधानसभा की कुल 403 सीटों में 300 पर खुद लड़ने को अड़ी थी, लेकिन गठबंधन को अंजाम पर पहुंचाने के लिए अब खुद तीन सौ के नीचे आने को तैयार हो गई है।
पहले जदयू नेता शरद यादव के यहां चौधरी चरण सिंह की जयंती पर जमावड़ा और उसके बाद अलग -अलग बैठकों ने गठबंधन का माहौल बनाया। सपा से ठाकुर अमर सिंह इस जमावड़े में पहुंचे और कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद और रालोद प्रभारी चौधरी अजित सिंह से मिले। इसके बाद वह लखनऊ पहुंचे।  अमर सिंह ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव से मुलाकात की. इस दौरान मीडिया से बातचीत में अमर सिंह ने कांग्रेस एवं आरएलडी नेताओं से मुलाकात की तो पुष्टि की, लेकिन गठबंधन के सवाल को यह कहते हुए टाल दिया कि इसका फैसला नेताजी और अखिलेश यादव मिलकर लेंगे।
शिवपाल यादव से मुलाकात को लेकर चल रही कयासों को कमतर करने की कोशिश करते हुए अमर सिंह ने कहा कि शिवपाल जी से हमारी बात होना, कोई खबर का मुद्दा नहीं, मैं कोई मायावती से मिलने तो आया नहीं। शिवपाल जी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और मैं राष्ट्रीय महासचिव हूं, वहीं कांग्रेस और आरएलडी से मुलाकात के सवाल पर अमर सिंह ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के आदेश पर वह चौधरी चरण सिंह पर आयोजित कार्यक्रम में गए। वहीं गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, शरद यादव, एच जी देवेगौड़ा, अजीत सिंह भी थे, तो उनसे मुलाकात हो गई। उन्होंने कहा, ये मुलाकात कोई बहुत बड़ी बात नहीं। मैं छोटा कार्यकर्ता हूं, गठबंधन की बातचीत नेता जी और मुख्यमंत्री जी के स्तर का मामला है। सनद रहे कि अखिलेश पहले से ही कांग्रेस के साठ गठबंधन की वकालत कर रहे हैं, वह कई मौकों पर कह चुके हैं कि यदि गठबंधन होता है तो  तीन सौ से अधिक सीटें जीतेंगे। दरअसल यह दांव है मुस्लिम मतों को रोकने के लिए। बसपा मुस्लिम मतों को खींचने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ रही और यह प्रचारित कर रही है कि सपा राज में जितने दंगे हुए उतने कभी नहीं हुए  जबकि कांग्रेस तम भर रही है कि भाजपा को रोकना क्षेत्रीय दलों के बूते की बात नहीं। दरअसल वह मुस्लिमों को संदेश दे रही है कि भाजपा को कांग्रेस ही रोक सकती है।

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