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भोपाल: मध्यप्रदेश में भोपाल के सेंट्रल जेल से भागने के लिए प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े आठ विचाराधीन कैदियों ने टूथब्रश और लकड़ी से चाबियां बनाई थी। मध्यप्रदेश की राजधानी स्थित केंद्रीय कारागार से प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े आठ विचाराधीन कैदियों के फरार होने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। भोपाल के पुलिस महानिरीक्षक योगेश चौधरी के मुताबिक इन सिमी कैदियों ने टूथब्रश (प्लास्टिक) और लकड़ी से चाबियां बनाई थीं और इसी से ताला खोलकर बैरक से बाहर आए। सिमी के ‘आतंकियों’ के मुठभेड़ में मारे जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बाद भोपाल के आईजी चौधरी ने सोमवार की देर शाम संवाददाताओं के सामने ब्योरा दिया।
चौधरी के मुताबिक सिमी के मारे गए कार्यकर्ता खतरनाक अपराधी थे जो 2008 और 2011 में खंडवा और दूसरी जगह दो कांस्टेबलों की हत्या में संलिप्त थे। इसके अलावा, उनमें से तीन 2013 में खंडवा में जेल से फरार होने की एक पूर्ववर्ती घटना में शामिल थे। पुलिस महानिरीक्षक से जब कथित रूप से मुठभेड़ स्थल पर शूट किए गए एक वीडियो के बारे में पूछा गया जिसमें एक पुलिसकर्मी को एक बेजान से दिख रहे शख्स पर गोलियां चलाते दिखाया गया है तो उन्होंने कहा, ‘हम पूरे दिन कार्रवाई में लगे रहे। हमें वीडियो और उसके सही होने की पड़ताल करनी होगी।’ चौधरी ने सिमी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का औचित्य जताते हुए कहा कि ये खतरनाक अपराधी थे जो गंभीर अपराधों में संलिप्त रहे थे और जो जेल में एक सुरक्षा गार्ड की हत्या कर भागे थे। उन्होंने बताया कि भोपाल पुलिस, विशेष कार्यबल और सीटीजी संयुक्त रूप से आपरेशन में शामिल थे। इन चर्चाओं पर पूछे गए सवाल पर कि सिमी कार्यकर्ताओं के पास कोई हथियार नहीं थे, उन्होंने कहा कि नियम-कायदे के हिसाब से जांच होगी और सभी तथ्यों को लिया जाएगा।
उन्होंने मुठभेड़ स्थल की भौगोलिक स्थिति की चर्चा करते हुए कहा कि सिमी कार्यकर्ताओं ने उंचाई से पुलिसकर्मियों पर हमला किया और उनकी हाथापाई भी हुई थी। बहरहाल, उन्होंने कहा कि मारे गए सिमी कार्यकर्ताओं के पास से कोई मोबाइल फोन बरामद नहीं हुए।  तीन साल में सिमी के कार्यकर्ताओं की जेल तोड़ने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश के खंडवा में एक जेल से सिमी के सात सदस्य भाग निकले थे। गृह मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सरकार से इस घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है जिससे यह पता चल सके कि क्या जेल प्रशासन की ओर से कोई चूक हुई या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं।

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