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भोपाल: कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी के आतंकियों के एनकाउंटर पर सवाल उठाया हैं और सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि हमेशा मुस्लिम कैदी ही जेल तोड़कर क्यों भागते हैं कोई हिंदू क्यों नहीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि क्या कारण है कि खंडवा से निकलते हैं तो सिमी के मुसलमान लड़के निकलते हैं कोई हिंदू नहीं निकलते हैं। भोपाल से भी मुस्लिम लड़के भागते हैं हिंदू नही भागते।
इस बीच केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने दिग्विजय सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कुछ लोग सुरक्षा के मुद्दे पर गंदी राजनीति कर रहे हैं जो उचित नहीं है। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ दिन पहले जब ओडिशा में नक्सली मारे गए थे तो किसी ने उनका धर्म नहीं पूछा। साथ ही केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिग्विजय सिंह के बयान पर सोनिया गांधी से जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा है कि दिग्विजय जो कह रहे हैं क्या वो कांग्रेस का आधिकारिक बयान है? साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की है।
गौर हो कि इससे पहले भी दिग्विजय सिंह ने भोपाल एनकाउंटर को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश पुलिस ने उच्च सुरक्षा वाली भोपाल केंद्रीय जेल से भागे सिमी के आठ सदस्यों को मुठभेड़ में इसलिए मार दिया क्योंकि पुलिस को डर था कि वे कुछ खुलासे कर देंगे। कांग्रेस महासचिव ने हिंदी में कुछ ट्वीट किये थे जिनमें उन्होंने घटना के मामले में अदालत की निगरानी में एनआईए जांच की और जेल के कामकाज की न्यायिक जांच की वकालत भी की। पूर्व मुख्यमंत्री ने हैरानी जताते हुए कहा कि केवल सिमी से जुड़े कैदी ही भागने में सफल कैसे रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने आठों को मार दिया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सिमी के सदस्यों के पास हथियार थे।
गौर हो कि सोमवार सुबह प्रधान आरक्षक की हत्या और एक प्रहरी को बांधकर भोपाल की केन्द्रीय जेल से तड़के फरार हुए सिमी के आठ आतंकियों को कुछ घंटे के बाद ही मध्यप्रदेश पुलिस ने शहर के निकट मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक सिमी के आठ आतंकवादी शेख मेहबूब, अमजद, जाकिर हुसैन, मोहम्मद सलीक, माजिद, खालिद अहमद, अकील, शेख नजीब भोपाल की केन्द्रीय जेल से फरार हुये थे। एक अक्तूबर 2013 को खंडवा स्थित जेल से भागे सिमी के सात कार्यकर्ताओं में से चार को तीन साल तक छिपे रहने के बाद मुश्किल से पकड़ा गया था और इन तीन साल में ये उग्रवादी मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त थे। सरकार ने सिमी पर वर्ष 2001 में प्रतिबंध लगा दिया था।

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