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पिछले विस चुनाव में पूर्वांचल ने दिया था साथ
लोस चुनाव में आजमगढ़ को छोड़कर भगवामय हो गया पूरा क्षेत्र
विद्याशंकर तिवारी
नई दिल्ली। राम को लेकर जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सियासत तेज हुई है उसके अपने निहितार्थ हैं। भगवाधारी भाजपा शुरू से राम की राजनीति करती आ रही है लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस तरह से अयोध्या में 22 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल थीम पार्क बनाने का निर्णय लिया है उसके अपने मायने हैं। रणनीति 2012 के विधानसभा चुनाव में मिले वोटों को सहेजने की है जो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में में छिटककर भाजपा के पाले में चला गया था।
दरअसल सपा पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश की बदौलत शासन में है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने कभी उसका मन से साथ नहीं दिया।  श्रीराम के नाम का यूं तो पूरे प्रदेश और देश पर असर होता है लेकिन पूर्वांचल का अयोध्या और राम से लगाव कुछ अलग किस्म का है। 2012 के विधानसभा चुनावों में इन क्षेत्रों की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी ने विजय पताका फहराया था। यहां तक कि अयोध्या की विधानसभा सीट भी सपा की झोली में चली गई जहां से  तेज नारायण पांडे विधायक हैं। इसके अलावा अयोध्या के आसपास मिल्कीपुर, बीकापुर, गोसाईंगंज, कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर, अकबरपुर, आजमगढ़, निजामाबाद, अतरौलिया, सगड़ी, फूलपुर पवई, दीदारगंज और लालगंज आदि विधानसभा सीटों पर सपा का ही कब्जा है। लेकिन विधानसभा चुनाव के दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में सपा आजमगढ़ को छोड़कर पूर्वांचल की सभी सीटें हार गई। फैजाबाद सीट से भाजपा के लल्लू सिंह ने दोगुने से भी ज्यादा वोटों से सपा के मित्रसेन यादव को हराया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव इस बात को सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि यदि उन्होंने अखिलेश की बजाय शिवपाल यादव की बात मानी होती तो स्थिति कुछ और होती। मुलायम की नजर पीएम की कुर्सी पर थी जिस पर मोदी लहर ने पानी फेर दिया। अब अखिलेश के सामने चुनौती है कि रामलला की नगरी और पूर्वांचल पर कब्जे को कैसे बरकरार रखा जाए लिहाजा उन्होंने केंद्र सरकार की रामायण सर्किट और संग्रहालय के जवाब में इंटरनेशनल थीम पार्क बनाने का ऐलान कर दिया। फैसले पर किन्तु परन्तु होने लगा तो सपा प्रवक्ता मोहम्मद शाहिद ने तीर छोड़ा कि भगवान राम किसी एक के नहीं हैं। हमारी सरकार पूरे प्रदेश का विकास कर रही है, उसी कड़ी में अयोध्या का भी विकास हो रहा है। इसके पहले दशहरा पर जय श्रीराम का नारा लगवाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सियासी हवा बदलने और अखिलेश उसे कुंद करने का प्रयास कर चुके हैं। स्वभाविक है अखिलेश सरकारा के इस कदम से भाजपा की परेशानी बढ़ी है लिहाजा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य कह रहे हैं कि बेशक विकास के मुद्दे पर पार्टी चुनाव लड़ेगी लेकिन उसने मंदिर मुद्दे को छोड़ा नही है। केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री महेश शर्मा जब अयोध्या पहुंचे तो उन्होंने इसमें जोड़ा  कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। रामायण संग्रहालय पूरे देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयास का हिस्सा है। यह दौरा सरकार के विकास के एजेंडे का हिस्सा है।

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