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विद्याशंकर तिवारी
श के सबसे बड़े सियासी कुनबे की कलह का अंजाम क्या होगा, यह तो भविष्य बताएगा लेकिन एक बात साफ हो गई है कि पार्टी हो या परिवार उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव की बादशाहत खत्म हो गई है। अखिलेश व शिवपाल दोनों खेमे इतने आगे बढ़ गये हैं कि पीछे हटना नामुमकिन तो नहीं लेकिन मुश्किल जरूर है। शिवपाल व उनके बेटे आदित्य बहुत होशियारी से अखिलेश के लिए पद छोड़ने और उन्हें ही सीएम चेहरा रखने की पैरोकारी कर रहे हैं लेकिन उसके पहले काला जादू से लेकर अलग-अलग रची गई साजिशों की पूरी जानकारी अखिलेश के पास है लिहाजा अखिलेश अपने समर्थकों की बिना शर्त पार्टी में वापसी और टिकट बांटने के संपूर्ण अधिकार के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं लेकिन जिस तरह से उदयवीर सिंह का निष्कासन और यूथ विंग के नये पदाधिकारी बनाये गये हैं उससे नहीं लगता कि परिवार का महाभारत थमने वाला है। अब सबकी नजरें कल अखिलेश द्वारा बुलाई गई विधायक दल की बैठक पर लगी है। अपने सियासी सफर में नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव पहली बार इतने असहाय दिख रहे हैं। दिनभर जो बैठकों का दौर चला उसमें मुलायम सिंह यादव कई बार बेबस तो कई बार भावुक हुए। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के लिए उन्होंने शिवपाल व आजम खां जैसे पुराने नेताओं के सामने हथजोड़ी की वही अखिलेश आज इतना बड़े हो गये हैं कि सियासी अखाड़े में पिता से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। बात सिर्फ शिवपाल से झगड़े तक होती तो भी गनीमत थी, अब तो अखिलेश सीधे पिता मुलायम से भिड़ गये हैं। मुलायम के घर जब वरिष्ठ नेता बेनी प्रसाद वर्मा, माता प्रसाद पाण्डेय, नरेश अग्रवाल, किरनमय नंदा, रेवतीरमण सिंह पहुंचे तो मुलायम भावुक हो गये और इन नेताओं से पूछा कि क्या यही दिन देखने थे। आज तक विरोधियों ने जो नहीं कहा वो हमारी पार्टी के लोगों ने मेरे परिवार के लिए कहा।  सबने नेताजी से से कहा कि वो दखल दें, ताकी पार्टी में सब कुछ ठीक हो जाए। इसके बाद रामगोपाल की चर्चा चली तो मुलायम सिंह और भाुवक हुए और बताते हैं कि बोल पड़े कि जिसे राजनीति में लाये और इतनी उचाइयां दी वह भाई अखिलेश के कहने पर नई पार्टी बनाने चुनाव आयोग तक पहुंच गया। गनीमत यह रही कि चुनाव आयोग में उन्हें बताया गया कि नई पार्टी के पंजीकरण में सात आठ महने का समय लगेगा इसलिए वो वापस लौट आए। इन नेताओं के साथ मुलायम की  बैठक के दौरान शिवपाल तीन बार आए और गए। हर बार उन्होंने कहा कि मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए, इससे शायद सब कुछ ठीक हो जाए, इस पर मुलायम ने कहा कि आप ऐसा हरगिज  नहीं करेंगे। इसी दौरान यह सहमति भी बनी कि सपा प्रमुख को चुनौती देने वाले नेताओं को बख्शा नहीं जाना चाहिए लिहाजा उदयवीर को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। बैठक में सबने मुलायम को समझाया कि अखिलेश इतने बुरे नहीं हैं, सबकी इज्जत करते हैं, पर बीच वाले गड़बड़ कर रहे हैं।  इन नेताओं ने कहा कि अखिलेश और पार्टी दोनों में से किसी का नुकसान नहीं होना चाहिए। दोनों में से एक का नुकसान दूसरे को अपूर्णीय क्षति पहुंचाएगा। इसके बाद मुलायम सिंह इस बात के लिए तैयार हो गये कि अखिलेश से आप लोग बात करें और उन्हें समझाएं। 

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