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वियंतियन (लाओस): पाकिस्तान पर नये सिरे से निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि हमारे पड़ोस में एक देश है जो आतंकवाद पैदा करता है और उसका निर्यात करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि इस उकसाने वाले देश को अलग-थलग करने और उस पर पाबंदी लगाने का समय आ गया है।
मोदी ने पूर्वी एशिया सम्मेलन (ईएएस) में पाकिस्तान का नाम लिये बिना अपने भाषण में कहा, ‘हमारे पड़ोस में एक देश है जिसका प्रतिस्पर्धात्मक लाभ केवल आतंकवाद को पैदा करने और उसका निर्यात करने में है।’ उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी राष्ट्रपति ली क्विंग की मौजूदगी में सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह निर्यात शांति के लिए जगह कम कर रहा है और हिंसा के लिए जगह बढ़ा रहा है और यह सभी की शांति और समृद्धि को जोखिम में डाल रहा है।’
मोदी ने कहा, ‘इस उकसाने वाले को अलग-थलग करने और इस पर पाबंदी लगाने का समय आ गया है।’ चार दिन पहले ही भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों का आह्वान किया था कि आतंकवाद से मुकाबला करने में संयुक्त प्रयासों को तेज किया जाए और आतंकवाद के समर्थकों तथा प्रायोजकों को अलग-थलग करने के लिए समन्वित कार्रवाई की जाए। मोदी ने 11वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) में कहा, ‘समय आ गया है कि हम आतंकवाद के इस वैश्विक निर्यातक को रोकें।’ उन्होंने कहा, ‘हमें न केवल आतंकवादियों पर बल्कि उनका समर्थन करने वाले पूरे तंत्र पर भी निशाना साधने की जरूरत है।’ मोदी ने कहा, ‘‘र ऐसे सरकारी तत्वों के लिए हमारी कड़ी से कड़ी कार्रवाई तय होनी चाहिए जो राजकीय नीति के औजार के रूप में आतंकवाद का सहारा लेते हैं।’ सफेद चूड़ीदार, कुर्ता और जैकेट पहने हुए मोदी ने चेतावनी दी कि आतंकवाद खुले और बहुलवादी समाज के लिए सबसे गंभीर चुनौती है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि इस समस्या से लड़ने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण एशिया के अधिकतर देश आर्थिक समृद्धि के लिए शांतिपूर्ण रास्ते पर चल रहे हैं लेकिन एक पड़ोसी देश इनसे अलग है। तीसरी बार सम्मेलन में भाग ले रहे मोदी ने कहा, ‘प्रतिस्पर्धी भू-राजनीतिक, परंपरागत और गैर-परंपरागत चुनौतियां क्षेत्र की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए खतरा पैदा करती हैं।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि आसियान वृहद क्षेत्रीय एकीकरण और सहयोग के प्रयासों का नेतृत्व करता रहेगा और उनके केंद्र में रहेगा।
मोदी ने कहा कि निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं की सदस्यता के माध्यम से और नरसंहार के हथियारों के पूर्ण और सत्यापन योग्य उन्मूलन को करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ईएएस परमाणु अप्रसार पर वक्तव्य को स्वीकार कर रहा है और भारत उसके उद्देश्यों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी ने कहा, ‘यह प्रयासों में समानता को रेखांकित करता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत क्षेत्र में चल रहे आर्थिक एकीकरण को गहरा करने के लिए एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा सकता है।
मोदी ने कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि नालंदा विश्वविद्यालय को जुलाई 2016 में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत ईएएस की रूपरेखा के दायरे में क्षेत्रीय, रणनीतिक राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं के साझा अनुसरण में अडिग रहेगा। प्रधानमंत्री यहां 18 सदस्यों वाले पूर्वी एशिया सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। ईएएस में संस्थापक सदस्य भारत के अलावा आसियान के दस सदस्य देश हैं और इनके अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, रूस, दक्षिण कोरिया और अमेरिका हैं।
शुरू में ईएएस का सालाना आयोजन पूर्वी एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशियाई क्षेत्रों के 16 देशों के नेता करते थे। बाद में 2011 में छठे ईएएस सम्मेलन में सदस्यता बढ़ाई गयी और अमेरिका तथा रूस के शामिल होने के साथ कुल 18 देश हो गये। ईएएस का आयोजन आसियान के नेताओं के सालाना सम्मेलन के बाद होता है। पहले ईएएस सम्मेलन का आयोजन 14 दिसंबर, 2005 को मलेशिया के कुआलालंपुर में किया गया था।

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