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नई दिल्ली : राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को पटना उच्च न्यायालय से मिली जमानत के खिलाफ सिवान के चंद्रकेश्वर प्रसाद शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे। गैंगेस्टर से नेता बने शहाबुद्दीन ने प्रसाद के चार में से तीन बेटों की कथित तौर पर हत्या कर दी थी। अधिवक्ता प्रशांत भूषण के कार्यालय ने बताया कि वे लोग अपील याचिका को अंतिम रूप दे रहे हैं जिसमें वे एक ‘हिस्ट्री शीटर’ की जमानत मंजूर किए जाने को चुनौती दे रहे हैं।
भूषण के कार्यालय के अधिवक्ता रोहित सिंह ने बताया कि हम मृतकों के पिता चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंद्रा बाबू की ओर से शुक्रवार को अपील दायर कर रहे हैं। हम अपील को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं और इसे कल दायर किया जाएगा, जिसमें कई आधार बताए गए हैं। सिंह ने बताया कि एक हिस्ट्री शीटर व्यक्ति की जमानत कैसे मंजूर की गई, उसे हमलोग चुनौती देंगे। मामलों की संख्या आदि और उनकी दोषसिद्धि के बारे में तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। गौरतलब है कि पटना उच्च न्यायालय ने सात सितंबर को शाहबुद्दीन की जमानत मंजूर की थी जिसके बाद वह 10 सितंबर को भागलपुर जेल से रिहा हुए थे। वह अपने खिलाफ दर्जनों मामलों के सिलसिले में 11 साल से जेल में थे। राजद के विवादास्पद बाहुबली नेता शाहबुद्दीन को 2014 के राजीव रोशन हत्या मामले में जमानत मिली थी। रोशन चंद्रकेश्वर प्रसाद के बेटे थे। रोशन अपने भाई गितिश और सतीश की हत्या के गवाह थे जिनकी 2004 में तेजाब से नहला कर हत्या कर दी गई थी। रोशन की हत्या का मुकदमा शुरू होना अभी बाकी है।
इस बीच, जेल से शाहबुद्दीन की रिहाई को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही बिहार सरकार भी जमानत के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में कथित तौर पर एक अपील दायर करने पर विचार कर रही है। वहीं, बिहार के सीवान जिले में हाल ही में मारे गए पत्रकार राजदेव रंजन की पत्नी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय का रुखकर इस हत्या कांड की जांच और मुकदमा वहां से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने की मांग की। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया में आई खबरों में उनके पति के दो फरार हत्यारों को हाल ही में रिहा राजद नेता शाहबुद्दीन और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के साथ दिखाया गया है। राजद के बाहुबली नेता शाहबुद्दीन की रिहाई का विषय विभिन्न याचिकाओं के जरिए अब शीर्ष न्यायालय पहुंच गया है।
उधर, राजद के बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन की जेल से रिहाई के बाद तीखी आलोचना झेल रही बिहार सरकार पटना उच्च न्यायालय की ओर से उन्‍हें दी गई जमानत के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने की तैयारी कर रही है। जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि नीतीश कुमार सरकार पिछले 11 वर्ष से इस स्थापित प्रक्रिया का पालन कर रही है कि यदि बिहार सरकार किसी को मिली जमानत से संतुष्ट नहीं है तो वह उंची अदालतों में अपील करती है। उन्होंने कहा कि अतीत में ऐसा हुआ है और वर्तमान में शहाबुद्दीन के मामले में भी इसका पालन किया जाएगा। प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे मामलों में यदि जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित जिला प्रशासन प्रस्ताव बनाता है और जमानत रद्द करने की याचिका दायर की जाती है। राजद के पूर्व सांसद की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका में हो रही देरी पर भाजपा द्वारा सवाल उठाए जाने को लेकर जदयू के प्रवक्ता ने कहा कि त्योहारों के कारण अदालतें बंद थीं।
गौर हो कि शहाबुद्दीन उनके खिलाफ दर्ज गंभीर अपराध के दर्जनों मामलों में पिछले 11 वर्षों से जेल में बंद था। उसे सात सितंबर को पटना उच्च न्यायालय ने जमानत दी, और शनिवार को वह भागलपुर जेल से रिहा हुआ।

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