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नई दिल्‍ली । उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने के अभियान पर निकले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को अयोध्या पहुंचकर हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद राहुल ने महंत ज्ञानदास से आधे घंटे तक मुलाकात की और फिर अपने रोड शो के लिए निकल गए। वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद नेहरू-गांधी परिवार के किसी सदस्य का अयोध्या का यह पहला दौरा है।
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अपनी किसान यात्रा के चौथे दिन की शुरुआत राहुल गांधी ने अयोध्या में हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चणा से की। साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से ऐसा पहली बार है जब गांधी परिवार का कोई सदस्‍य इस नगरी में पहुंचा है। राजीव गांधी 26 साल पहले अयोध्या के दौरे पर आए थे। अयोध्या में राहुल गांधी ने हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन किए। राहुल ने मंदिर के महंत ज्ञानदास से मुलाकात की। कांग्रेस नेता राहुल यहां करीब आधे घंटे तक रहे और उनसे बातचीत भी की।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी से महत्वकांक्षी किसान यात्रा और खाट सभा से पहले प्रसिद्ध दुग्धेश्वर नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की थी और अब किसान यात्रा के तहत राहुल अयोध्या पहुंचे हैं। वैसे भी अयोध्या को हिंदुत्व एजेंडे वाली राजनीति का गढ़ कहा जा सकता है और यहां राहुल ने अपनी यात्रा की शुरुआत हनुमानगढ़ी मंदिर से की है। ज्ञानदास विश्व हिन्दू परिषद के प्रति विरोधी रुख रखने वाले माने जाते हैं। राहुल नेहरू-गांधी परिवार के ऐसे पहले सदस्य हैं, जिन्होंने छह दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद अयोध्या की यात्रा की है। ऐसे में राहुल की हनुमानगढ़ी की यात्रा राजनीतिक लिहाज से भी महत्व रखती है। हनुमानगढ़ी मंदिर अयोध्या के विवादित स्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर है। राहुल उस शिलान्यास स्थल से भी दूर रहे जहां वर्ष 1989 में राम मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी।

इलाके के पुराने बाशिंदे बताते हैं कि करीब 26 साल पहले राहुल के पिता दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वर्ष 1990 में अपनी ‘सद्भावना यात्रा’ के दौरान हनुमानगढ़ी मंदिर जाने का कार्यक्रम बनाया था लेकिन वक्त की कमी की वजह से वह वहां नहीं जा सके थे। राजीव गांधी की 21 मई 1991 को हत्या कर दी गयी थी। उस वक्त राहुल 20 साल के थे।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पिछले महीने हुई वाराणसी की यात्रा के भी निहितार्थ निकाले गये। उस दौरान तबीयत खराब होने के बावजूद वह काशी विश्वनाथ मंदिर भी गयी थीं। सोनिया भी वर्ष 1992 से अयोध्या नहीं गयीं। वह चुनाव अभियान के तहत फैजाबाद गई थीं। हनुमानगढ़ी की यात्रा के बाद राहुल अपने रोडशो की तैयारी के लिए सर्किट हाऊस लौट आए। राहुल अम्बेडकर नगर में किछौछा शरीफ की दरगाह भी जाएंगे। माना जा रहा है कि संतुलन बनाये रखने के लिये उनकी यात्रा तय की गयी है।

करीब 27 साल से प्रदेश की सत्ता से दूर कांग्रेस को सूबे में फिर से सियासी ताकत बनाने की योजना तैयार करने वाले प्रशान्त किशोर का मानना है कि कांग्रेस को मुस्लिम, ब्राहमण तथा अन्य पिछड़ा वर्गों के बाहुल्य वाले इलाकों में विधानसभा का चुनाव जीतना चाहिए। बीते कुछ सालों से कांग्रेस की छवि धर्मनिरपेक्ष पार्टी के बजाय हिंदू विरोधी पार्टी के तौर पर बनने लगी थी। यूपी की सत्ता से 27 साल से दूर कांग्रेस अब अपनी इस छवि को तोड़ना चाहती है क्योंकि उसे पता है कि यूपी की गद्दी हिंदू वोटों को दरकिनार करके नहीं मिल सकती है। राजनीतिक जानकार राहुल की इस अयोध्‍या यात्रा को कांग्रेस के नरम हिंदुत्‍व एजेंडे के रूप में देख रहे हैं। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह पर कांग्रेस पहले ही यूपी में ब्राह्मण केंद्रित चुनावी अभियान चला रही है। बता दें कि प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी की एक माह की यात्रा की पूरी रुपरेखा तैयार की है।

गौर हो कि राहुल देवरिया से दिल्ली तक 2500 किलोमीटर की महायात्रा कर रहे हैं, जो महीने भर चलेगी। यात्रा के तहत ही खाट सभाएं की जा रही हैं।

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